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‘सुशासन तिहार’ समेत शासन के कार्यों में रुचि नहीं लेने पर 2 पंचायत सचिव निलंबित

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ShivApr 30, 20251 min read

अभनपुर। जिला पंचायत रायपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जनपद…

स्कूल शिक्षा विभाग ने 2800 प्राचार्यों की जारी पदोन्नति सूची, देखें लिस्ट…

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ShivApr 30, 20251 min read

रायपुर। राज्य शासन ने बड़े पैमाने पर शिक्षा विभाग में…

बीएडधारी सहायक शिक्षकों के समायोजन को लेकर आदेश जारी, 5 बिंदुओं में जारी किए निर्देश…

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ShivApr 30, 20252 min read

रायपुर। साय कैबिनेट में आज बर्खास्त बीएडधारी शिक्षकों के समायोजन के…

4 आईएएस अफसरों का तबादला, रीना बाबा कंगाले की मंत्रालय में हुई वापसी, देखें तबादला आदेश…

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ShivApr 30, 20252 min read

रायपुर।  राज्य सरकार ने 4 आईएएस अधिकारियों का तबादला किया…

इस्कॉन की भूमिका वैश्विक है : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

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ShivApr 30, 20254 min read

भोपाल।    भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के संदेश और…

सामूहिक विवाह सामाजिक सुधार का है महत्वपूर्ण कदम – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

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ShivApr 30, 20254 min read

भोपाल।   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देश एवं प्रदेशवासियों को…

April 30, 2025

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

गंदा पानी पीने को लोग मजबूर, शिकायतों के बाद भी समाधान नहीं

कवर्धा। जिले से करीब 80 किमी दूर हरे-भरे जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसा दलदली गांव प्राकृतिक सौंदर्य से तो समृद्ध है, लेकिन बुनियादी जरूरतों में सबसे अहम पानी के लिए आज भी जूझ रहा है। लगभग 600 की आबादी वाले इस गांव में ज्यादातर लोग विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा से हैं, और विडंबना यह है कि यह वही इलाका है, जहां से हर साल करोड़ों रुपये की रॉयल्टी सरकार को मिलती है, क्योंकि यहीं जिले की इकलौती बॉक्साइट खदान है।

दिखने में हरा-भरा और शांत गांव, लेकिन असलियत में यहां की महिलाएं और बच्चे रोज पानी के लिए जद्दोजहद करते हैं। झिरिया, यानी मिट्टी के गड्ढों से गंदा पानी छानकर पीना इनकी मजबूरी बन चुकी है। गर्मियों में तो हाल और खराब हो जाता है – कई बार सिर्फ पानी ढूंढ़ते हुए पूरा दिन निकल जाता है। यह पानी न केवल गंदा होता है, बल्कि उसमें तरह-तरह के बैक्टीरिया और कीटाणु होने का भी खतरा बना रहता है, जिससे लोगों में संक्रामक बीमारियां फैलने का डर हर समय बना रहता है।

ग्रामीणों ने बार-बार शासन-प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया। वहीं प्रशासन का कहना है कि जल जीवन मिशन के तहत काम चल रहा है और इलाके में जरूरी संसाधन भी दिए गए हैं। लेकिन सवाल वही का वही है कि अगर सब कुछ ठीक है, तो फिर गांव वाले गंदा पानी क्यों पी रहे हैं?

इस स्थिति की जानकारी ग्रामीणों ने कई बार शासन-प्रशासन को दी, शिकायतें दर्ज करवाईं, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। हैरानी की बात यह है कि जहां सरकार को करोड़ों की आमदनी हो रही है, वहीं उसी जमीन पर रहने वाले लोग पानी की एक बूंद के लिए तरस रहे हैं।

प्रशासन की माने तो इस इलाके में पानी के लिए साधन उपलब्ध कराए हैं और और जल जीवन मिशन के तहत कार्य प्रगतिरत है, तो फिर सवाल यह उठता है कि प्रशासन सुविधा उपलब्ध करा रही है तो आखिर इस इलाके में इस तरह की तस्वीर क्यों देखी जा रही है, यहां के लोग आज भी झिरिया का नाले का गंदा पानी क्यों पी रहे हैं, आदिवासी बैगा समुदाय के लिए भी एक बेहतर जीवन की आशा कब साकार होगी ?