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बस्तर में नक्सल गतिविधियों में कमी से बढ़ी पर्यटकों की संख्या, टूरिज्म से हुई रिकॉर्ड तोड़ कमाई, 5 लाख से अधिक टूरिस्ट पहुंचे वनांचल

जगदलपुर। जैसे-जैसे बस्तर में नक्सली घटनाओं में कमी आई है वैसे-वैसे बस्तर की तरफ पर्यटकों का ध्यान बढ़ने लगा है. इसका असर इस बार के पर्यटन पर भी दिखाई दिया. पिछले 5 सालों में सर्वाधिक 5 लाख से अधिक पर्यटक बस्तर पहुंचे हैं. जिला मुख्यालय में इन्होंने तीरथगढ़, चित्रकूट के साथ ही कांगेर नेशनल पार्क का दौरा किया. केवल कांगेर नेशनल पार्क जाने वाले ही 2 लाख 19 हजार 959 पर्यटक हैं. यहां इको टूरिज्म की बढ़ती गतिविधियों की वजह से टूरिज्म काफी तेजी से बढ़ा है.

काया किंग और बंबू राफ्टिंग की सुविधा

दरअसल कांगेर घाटी नेशनल पार्क इन दिनों पर्यटकों की खास पसंद बनता जा रहा है. बीते 5 सालों में सर्वाधिक 2 लाख 20 हजार के करीब पर्यटक कांगेर नेशनल पार्क पहुंचे. कांगेर नेशनल पार्क को ही सिर्फ पर्यटकों की वजह से एक करोड़ 17 लाख 24 हजार 245 रुपए की आमदनी हुई है. अब तक की यह रिकॉर्ड आमदनी है. कांगेर नेशनल पार्क में काया किंग, कुटुमसर गुफा, तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर धारा, शिवगंगा और कैलाश गुफा जैसे स्थान मौजूद है, जिन्हें देखने बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं. पर्यटकों को यहां काया किंग और बंबू राफ्टिंग भी उपलब्ध है, जिसकी वजह से पर्यटक यहां रुक कर अपना समय भी बिताते हैं.

स्थानीय लोगों को हो रहा रोजगार मुहैया

कांगेर नेशनल पार्क के आंकड़े हैं इसके साथ ही अगर चित्रकूट और बस्तर के दूसरे क्षेत्रों में पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या जोड़ दी जाए तो यह संख्या करीब 5 लाख से अधिक है. बीते 5 सालों में बस्तर में नक्सली घटनाएं कम हुई है और इसकी वजह से ही पर्यटकों की आवाजाही लगातार बढी है. इनमें स्थानीय पर्यटकों की संख्या ही सर्वाधिक है, जो पर्यटन केंद्र में घूम कर स्थानीय लोगों को भी रोजगार का साधन मुहैया करा रहे हैं. पिछले कुछ सालों में पर्यटन की दिशा में काम को लेकर शुरुआत की गई है और जल्द ही तीरथगढ़ और चित्रकूट में ग्लास ब्रिज का भी निर्माण किया जाना है, जिससे आने वाले दिनों में यहां पर्यटन गतिविधियों और बढ़ सकती हैं.