धमतरी में औषधीन पौधे की खेती कर अब किसान बनेंगे लखपति, कलेक्टर ने पहले चरण में 200 एकड़ रकबे में खेती की बनायी योजना
धमतरी। धमतरी जिला में औषधीन पौधों की खेती कर किसान लखपति बन रहे है। किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही इन खेती को बढ़ावा देने की दिशा में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने 200 एकड़ रकबे में मखाना की खेती के साथ ही नारियल, मिलेट्स और उद्यानिकी फसलों को खेती को बढ़ावा देने की कार्ययोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। धमतरी जिला में किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने एक और नई पहल की है। धमतरी जिले में विशेषकर कुरूद, मगरलोड, धमतरी विकासखण्डों में औषधीय पौधों की खेती से किसानों की आय बढ़ाने पर जल्द ही काम शुरू होगा।
इसके लिए कलेक्टर ने आज गुरूवार को औषधीय पादप बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जे.सी.एस. राव के साथ बैठक की। बैठक में वनमण्डलाधिकारी श्रीकृष्ण जाधव, सीईओ जिला पंचायत रोमा श्रीवास्तव सहित औषधीय पादप बोर्ड के सलाहकार मौजूद रहे।बैठक में धमतरी जिले में औषधीय पौधों की खेती की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। जिले में औषधीय पौधों की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी को ध्यान में रखते हुए खेती की कार्ययोजना बनाई जा रही है। पादप बोर्ड के सीईओ ने जिले में औषधीय पौधों की खेती से किसानों की आय में तेजी से बढ़ोत्तरी होने के बारे में बताया। उन्होंने एक एकड़ भूमि पर एक साल में औषधीय पौधों की खेती से किसानों को 75 हजार रूपये से लेकर एक लाख रूपये तक के शुद्ध मुनाफे की जानकारी दी।
सीईओ ने बताया कि वनभूमियों, सामुदायिक खेती अनुबंध आधारित खेती के साथ-साथ स्व सहायता समूहों को औषधीय पौधों की खेती से जोड़कर जिले को हर्बल जिले के रूप में नई पहचान दिलाई जा सकती है। सीईओ ने यह भी बताया कि इसके लिए औषधीय पादप बोर्ड द्वारा किसानों को अनुदान, प्रशिक्षण और सीडलिंक्स आदि के लिए आर्थिक सहायता भी पात्रता अनुसार दी जाएगी। किसानों के खेतों में अनुबंध खेती के तहत उगाए गए औषधीय उत्पादों को बेचने के लिए भी पादप बोर्ड द्वारा सहायता दी जाएगी। बड़ी फार्मा कम्पनियों, आयुर्वेदिक उत्पाद निर्माताओं और निर्यातकों की सहायता से इन उत्पादों को देश-विदेश में बेचने में मदद की जाएगी।
लगभग 200 एकड़ रकबे में शुरू होगी औषधीय पौधों की खेती
जिले मे पहले चरण में कुरूद, मगरलोड और धमतरी विकासखण्ड के चयनित गांवों में लगभग 200 एकड़ रकबे में औषधीय पौधों की खेती शुरू करने की प्रशासन की योजना है। अगले एक सप्ताह में विकासखण्ड स्तर पर गांवों और हितग्राहियों का चयन करने का लक्ष्य प्रशासन ने निर्धारित किया है। इसके लिए पहले से ही पंचायत स्तर पर ग्रामीणों की बैठक लेकर उन्हें औषधीय पौधों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने का काम किया जा रहा है। जिले में खस, ब्राम्ही, लेमनग्रास, शतावरी, गिलोय, तुलसी, बच, पचौली जैसे औषधीय पौधों की खेती की योजना है। जिले में शतावरी, गिलोय, ब्राम्ही, तुलसी के लगभग 20 हजार पौधें नर्सरियों में उपलब्ध हैं। जिन्हें चालू मानसून में बूटीगढ़ और आसपास के क्षेत्र में रोपा जाएगा। इसके साथ ही लगभग 70 एकड़ रकबे में खस और 30 एकड़ में ब्राम्ही के पौधे भी रोपने की तैयारी की जा चुकी है।
धमतरी में हर्बल मंडी स्थापना का भी प्लान
औषधीय पौधों की खेती से कम लागत में अच्छे फायदे को ध्यान में रखते हुए इनके विपणन के लिए धमतरी में हर्बल मंडी स्थापित करने की भी प्रशासन की योजना है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने इसके लिए स्थानीय कृषि उपज मंडी में स्थल चयन करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। धमतरी में हर्बल मंडी स्थापित हो जाने से जिले के औषधीय खेती करने वाले किसानों के साथ-साथ आसपास के इलाकों के लोगों को फायदा होगा।






