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उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने नगरीय निकायों के कार्यों की समीक्षा की

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ShivFeb 28, 20252 min read

रायपुर।    उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री…

भारत ने विज्ञान के क्षेत्र में गढ़े हैं नए कीर्तिमान : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

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ShivFeb 28, 20254 min read

भोपाल।    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विज्ञान…

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से केन्द्रीय राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरूगन और श्री आठवले ने की भेंट

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ShivFeb 28, 20251 min read

भोपाल।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शुक्रवार की शाम समत्व…

मध्यप्रदेश में बनेगी साइंस सिटी : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

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ShivFeb 28, 20251 min read

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में…

February 28, 2025

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

नक्सलियों ने पुलिस मुखबिरी के शक में ग्रामीण को उतारा मौत के घाट, पर्चा फेंक कर फैलाया दहशत

बीजापुर।  कोर नक्सल क्षेत्र बीजापुर के ग्राम केशामुंडी में नक्सलियों ने बीती रात एक ग्रामीण की पुलिस मुखबिरी के आरोप में निर्ममता से हत्या कर दी. मौके से प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन भैरमगढ़ एरिया कमेटी का पर्चा भी बरामद हुआ है. सूचना पर पहुंची भैरमगढ़ थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पीएम के लिए भेज दिया है और घटना की जांच में जुट गई है.

जानकारी के अनुसार, ग्रामीण की पहचान केशामुंडी निवासी भदरू सोढ़ी, उम्र 41 वर्ष, पिता- हिडमा के रूप में हुई है. बीती रात नक्सलियों ने भदरू के घर घुस कर कुल्हारी से सिर पर वार कर उसकी हत्या कर दी. मौके से बरामद पर्चे में लिखा है कि वे उसे पहले ही मार देते, लेकिन वह बच गया. गांव में नक्सलियों की जानकारी देने के आरोप में उन्होंने ग्रामीण की हत्या कर दी है.

बता दें, प्रदेश में भाजपा सरकार के आते ही छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान तेजी से चल रहा है. केंद्रीय गृह मंत्री ने 2026 तक नक्सलियों का सफाया करने का लक्ष्य रखा है. इसके बाद से लगातार सुरक्षा बल के जवान नक्सलियों की मांद में घुस कर उनका सफाया कर रहे हैं. इसके अलावा माओवादियों के कोर क्षेत्र में नवीन सुरक्षा बलों के कैंप निर्माण से माओवादियों का आधार क्षेत्र सिमट रहा है. इस बात की खीझ वे आम निर्दोष आदिवासी ग्रामीणों पर निकाल रहे हैं.

नक्सली कभी गद्दारी, कभी पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाकर भय का माहौल बनाने के लिए ग्रामीणों की नृशंस हत्या कर अपने जनविरोधी, आदिवासी विरोधी, विकास विरोधी होने का परिचय दे रहे हैं. वहीं कुछ माओवादी सरकार की पुनर्वास नीति योजना का लाभ लेने समाज की मुख्य धारा से जुड़ने के लिए सरेंडर भी कर रहे हैं. इससे से भी नक्सलियों की परेशानी बढ़ने लगी है.