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छत्तीसगढ़ के सुदूर पंचायत क्षेत्रों की वित्तीय सहायता पर सांसद बृजमोहन ने संसद में उठाए सवाल

नई दिल्ली/रायपुर।   रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल छत्तीसगढ़ के विकास को लेकर संसद में लगातार सरकार से सवाल पूछ रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने छत्तीसगढ़ के सुदूर पंचायत क्षेत्रों को मिलने वाली वित्तीय सहायता पर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्र सरकार से छत्तीसगढ़ जैसे अपेक्षाकृत कम जनसंख्या वाले छोटे और दूरस्थ पंचायत क्षेत्रों को भी पर्याप्त वित्तीय सहायता पर जानकारी मांगी। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि पंचायतों को सशक्त बनाने और उनके प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करने के लिए अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए हैं।

राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम

बृजमोहन अग्रवाल के सवालों के जवाब में पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. बघेल ने बताया कि राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान योजना के तहत वित्त वर्ष 2022-23 से अब तक छत्तीसगढ़ के 3,71,743 प्रतिभागियों सहित पूरे देश में 1,14,61,210 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य निर्वाचित प्रतिनिधियों, पदाधिकारियों और अन्य हितधारकों को प्रशिक्षण देकर पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाना है।

वित्तीय सहायता और पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका

राज्य मंत्री ने आगे बताया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 280 केंद्रीय वित्त आयोग को संघ और राज्यों के संबंधित निकायों की वित्तीय स्थिति का आकलन करने और विभिन्न उद्देश्यों के लिए वित्तीय अनुदान की सिफारिश करने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि 15वें वित्त आयोग द्वारा अपनाए गए निधियों के वितरण मानदंड के तहत 90% राशि जनसंख्या के आधार पर और 10% राशि राज्यों के क्षेत्रफल के आधार पर आवंटित की जाती है।

इसके अलावा, पंचायती राज मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2022-23 से राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान की संशोधित केंद्र प्रायोजित योजना को लागू किया है, जिसके तहत पंचायत प्रतिनिधियों को नेतृत्व क्षमता विकसित करने और पंचायतों को अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करने में सक्षम बनाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल की प्रतिक्रिया

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित देश के सभी पंचायत क्षेत्रों में आवंटित निधि का सही और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि सुदूर पंचायत क्षेत्रों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने और उनके विकास के लिए विशेष योजनाएं चलाई जाएं। उन्होंने कहा कि पंचायतों के समग्र विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन और प्रभावी प्रशिक्षण कार्यक्रम आवश्यक हैं।