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ग्रामीण विकास में सरपंचों की है महत्वपूर्ण भूमिका – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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Shiv Mar 10, 2026 2 min read

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित…

पूर्व IAS अनिल टुटेजा की जमानत याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा –

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Shiv Mar 10, 2026 3 min read

दिल्ली। जेल में बंद पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा की उस…

उड़ान योजना और हवाई अड्डों के विस्तार पर संसद की बैठक में उठी चर्चा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने रखे सुझाव

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Shiv Mar 10, 2026 2 min read

नई दिल्ली/रायपुर।  रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद बृजमोहन अग्रवाल मंगलवार…

प्रदेश में नशे के कारोबार पर सरकार सख्त, अफीम खेती मामले में मंत्री का बयान

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Shiv Mar 10, 2026 1 min read

रायपुर। दुर्ग जिले में अफीम की अवैध खेती का मामला…

गैस सिलेंडर हादसे में मुआवजा देना होगा: IOC और SBI इंश्योरेंस की अपील खारिज

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Shiv Mar 10, 2026 2 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने गैस सिलेंडर ब्लास्ट…

दुर्ग के बाद अब बलरामपुर में अफीम खेती का मामला सामने आया

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Shiv Mar 10, 2026 1 min read

बलरामपुर। छत्तीसगढ़ में अवैध अफीम की खेती के मामले लगातार सामने…

March 10, 2026

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नई दिल्ली में आयोजित प्राक्कलन समिति की बैठक में शामिल हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ में नए कृषि विज्ञान केंद्र खोलने का मुद्दा उठाया

रायपुर।    छत्तीसगढ़ के किसानों की आमदनी बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल लगातार प्रयासरत है। इसी तारतम्य में बृजमोहन अग्रवाल ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित प्राक्कलन समिति की बैठक में छत्तीसगढ़ में नए कृषि विज्ञान केंद्र खोलने और वन क्षेत्रों वाले जिलों में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का मुद्दा उठाया। बैठक का आयोजन “कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) के माध्यम से जलवायु अनुकूल कृषि, प्राकृतिक और जैविक खेती को प्रोत्साहन” विषय कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई और आगामी कार्य योजना तैयार की गई।

इस बैठक का उद्देश्य स्थायी कृषि विकास के लिए एक ठोस आधार तैयार करना था, जिससे किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील बनाने और उनकी आजीविका को सुरक्षित रखने में मदद मिल सके। केंद्र सरकार वर्ष 2015-16 से देश में प्राथमिक रूप से जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए पूर्वोत्तर राज्यों को छोड़कर सभी राज्यों में परम्परागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए जैविक मूल्य श्रृंखला विकास मिशन (एमओवीसीडीएनईआर) नामक योजनाएं बनाई गई हैं। दोनों योजनाओं का कार्यान्वयन राज्य सरकार के माध्यम से किया जाता है।

पीकेवीवाई योजना को न्यूनतम 20 हेक्टेयर आकार के क्लस्टर मोड़ में कार्यान्वित किया जा रहा है और राज्यों को जैविक उपज के विपणन (मार्केटिंग) की सुविधा के लिए मैदानी क्षेत्रों में 1000 हेक्टेयर और पहाड़ी क्षेत्रों में 500 हेक्टेयर के क्लस्टर आकार में कार्यान्वित करने के लिए कहा गया है। सभी किसान पात्र हैं, लेकिन किसी समूह के भीतर एक किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर तक लाभ उठा सकता है।