Special Story

अस्पताल परिसर में लगी भीषण आग, आधा दर्जन कंडम एंबुलेंस समेत अन्य वाहन जलकर खाक

अस्पताल परिसर में लगी भीषण आग, आधा दर्जन कंडम एंबुलेंस समेत अन्य वाहन जलकर खाक

Shiv Mar 9, 2026 1 min read

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में…

बिलासपुर में अवैध हुक्का बार पर पुलिस की दबिश, होटल मैनेजर गिरफ्तार

बिलासपुर में अवैध हुक्का बार पर पुलिस की दबिश, होटल मैनेजर गिरफ्तार

Shiv Mar 9, 2026 2 min read

बिलासपुर। जिले में अवैध रूप से संचालित हुक्का बार पर…

रायपुर ट्रैफिक पुलिस की सख्त कार्रवाई, 10 दिन में 614 नशेड़ी ड्राइवर पकड़े गए

रायपुर ट्रैफिक पुलिस की सख्त कार्रवाई, 10 दिन में 614 नशेड़ी ड्राइवर पकड़े गए

Shiv Mar 9, 2026 2 min read

रायपुर। राजधानी रायपुर में सड़क हादसों पर लगाम लगाने और नशे…

March 9, 2026

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

छत्तीसगढ़ के जेलों में क्षमता से अधिक कैदी: हाईकोर्ट ने शासन से मांगा जवाब, कहा – उठाएं ठोस कदम

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों की समस्या को लेकर दायर याचिका पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामला मुख्य न्यायाधीश की डिवीजन बेंच में सूचीबद्ध था। सुनवाई के दौरान अदालत ने शासन से प्रदेश की जेलों की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा।

याचिका में बताया गया कि प्रदेश में जेलों की कुल क्षमता लगभग 15 हजार कैदियों की है, जबकि वर्तमान में 20 हजार पांच सौ से अधिक कैदी बंद हैं। यानी क्षमता से करीब 5,500 कैदी अधिक हैं। इस स्थिति से जेलों में भीड़भाड़ बढ़ रही है, जिससे कैदियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और पुनर्वास पर गंभीर असर पड़ रहा है।

सुनवाई के दौरान जेलों में वरिष्ठ सहायता कल्याण अधिकारियों की नियुक्ति पर भी बहस हुई। शासन ने अदालत को बताया कि प्रदेश के पांच केंद्रीय जेलों में से केवल दो में सहायता कल्याण अधिकारी नियुक्त हैं, जबकि शेष तीन में नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। अदालत को यह भी अवगत कराया गया कि नियमों के अनुसार प्रदेश के सभी जिला जेलों में सहायता कल्याण अधिकारी होना अनिवार्य है।

अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जेल सुधार और कैदियों के पुनर्वास के लिए यह पद अत्यंत महत्वपूर्ण है। अदालत ने शासन को निर्देश दिया कि वह इस मामले में जल्द से जल्द उचित कदम उठाए और सभी जिला जेलों में सहायता कल्याण अधिकारी की नियुक्ति सुनिश्चित करे।

साथ ही हाईकोर्ट ने शासन से 8 दिसंबर तक शपथ पत्र में जवाब पेश करने के निर्देश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला मानवाधिकारों से जुड़ा है और सरकार को इसे प्राथमिकता के आधार पर सुलझाना चाहिए।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जेलों में बढ़ती भीड़भाड़ से न केवल प्रशासनिक चुनौतियां बढ़ रही हैं, बल्कि कैदियों के पुनर्वास और सुधार के प्रयास भी प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि अंडरट्रायल कैदियों के मामलों का शीघ्र निपटारा, परोल और जमानत नीति में सुधार जैसे कदम इस समस्या को कम कर सकते हैं।

अगली सुनवाई में अदालत से उम्मीद है कि शासन द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले विस्तृत शपथ पत्र के आधार पर जेल सुधार के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। यह मामला प्रदेश में जेल प्रशासन और कैदियों की स्थिति पर व्यापक सुधार की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है।