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अस्पताल परिसर में लगी भीषण आग, आधा दर्जन कंडम एंबुलेंस समेत अन्य वाहन जलकर खाक

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Shiv Mar 9, 2026 1 min read

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बिलासपुर में अवैध हुक्का बार पर पुलिस की दबिश, होटल मैनेजर गिरफ्तार

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Shiv Mar 9, 2026 2 min read

बिलासपुर। जिले में अवैध रूप से संचालित हुक्का बार पर…

March 9, 2026

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24 अक्टूबर को माओवादियों का देशव्यापी बंद: सरकार की नीतियों और ‘ऑपरेशन कगार’ के विरोध में बंद का किया आह्वान

बस्तर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है या यूं कहें कि वो आखिरी सांसें गिन रहा है। सुरक्षा बलों के नक्सल ऑपरेशन से नक्सली भयभीत और घबराये हुए हैं और लगातार सरेंडर कर रहे हैं। इस बीच भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने केंद्र और राज्य सरकारों के खिलाफ देशव्यापी बंद का आह्वान किया है। पार्टी के केंद्रीय समिति प्रवक्ता अभय द्वारा बीते 15 अक्टूबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में 18 से 23 अक्टूबर तक विरोध सप्ताह मनाने और 24 अक्टूबर को देशभर में बंद पालन करने की घोषणा की गई थी।

बता दें कि प्रवक्ता अभय ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें कॉर्पोरेट कंपनियों के हित में देश के आदिवासी इलाकों में “कगार युद्ध” (Counter Guerrilla Operation) चला रही हैं, जिसमें उनके शीर्ष नेता और कार्यकर्ताओं को योजनाबद्ध तरीके से मारा जा रहा है। विज्ञप्ति में कई शीर्ष माओवादी नेताओं की हालिया मौतों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि पिछले 22 महीनों में लगभग 700 माओवादी और समर्थक मारे गए हैं।

माओवादियों ने दावा किया कि सितंबर महीने में छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा में हुई कई मुठभेड़ों में उनके केंद्रीय समिति और राज्य समिति के वरिष्ठ सदस्यों की हत्या की गई। पत्र में कहा गया कि सरकार “केंद्रित सैन्य अभियान” के तहत आने वाले पांच महीनों में छत्तीसगढ़ के नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा, झारखंड के पश्चिम सिंहभूम और ओडिशा के कई नक्सल प्रभावित जिलों में बड़े पैमाने पर अभियान चलाने की तैयारी में है।

पत्र में केंद्र की भाजपा सरकार पर आरोप लगाया गया है कि वह “विकसित भारत 2047” के नाम पर देश को “कॉर्पोरेट हिन्दू राष्ट्र” में बदलने की कोशिश कर रही है, और इसके विरोध में उठने वाली हर आवाज को दबाने के लिए ‘अर्बन नक्सल’ का ठप्पा लगाया जा रहा है। पार्टी ने इसे फासीवादी नीति बताते हुए व्यापक जन प्रतिरोध आंदोलन खड़ा करने की अपील की है।

माओवादी संगठन ने देश की जनता, मजदूर, किसान, आदिवासी और बुद्धिजीवियों से ग्रामों, कस्बों और शहरों में रैलियों, सभाओं और धरनों के माध्यम से सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की है।

देखें माओवादियों का पत्र

इस बीच, सुरक्षा एजेंसियों ने छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा समेत माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी है। केंद्रीय सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और संवेदनशील इलाकों में विशेष गश्त जारी है। पुलिस का कहना है कि किसी भी हिंसक गतिविधि को सख्ती से निपटाया जाएगा।