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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 14 मार्च को बिलासपुर से करेंगे “गौधाम योजना” का शुभारंभ

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Shiv Mar 13, 2026 3 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में निराश्रित और घुमंतू गौवंश…

पट्टीकल्याणा में आरएसएस की तीन दिवसीय प्रतिनिधि सभा शुरू, देशभर से 1400 प्रतिनिधि शामिल

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Shiv Mar 13, 2026 5 min read

पट्टीकल्याणा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की…

EOW-ACB ने बैंक घोटाले में चालान पेश किया, ढाई करोड़ गबन की जांच जारी

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Shiv Mar 13, 2026 2 min read

रायपुर। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एन्टी करप्शन ब्यूरो ने…

छत्तीसगढ़ विधानसभा में उच्च शिक्षा विभाग की 1306 करोड़ से अधिक की अनुदान मांगें पारित

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Shiv Mar 13, 2026 4 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम…

ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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Shiv Mar 13, 2026 3 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ देश की अर्थव्यवस्था का पावर इंजन है और…

मंत्री टंक राम वर्मा के राजस्व विभाग की 3502 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें विधानसभा में पारित

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Shiv Mar 13, 2026 4 min read

रायपुर।  छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा…

March 13, 2026

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

माओवादियों ने फिर दिया शांति वार्ता का प्रस्ताव, कहा- हम तैयार हैं, लेकिन अनुकूल माहौल बनाना जरूरी…

रायपुर। सप्ताह भर बीते नहीं कि माओवादियों ने एक बार फिर से शांति का प्रस्ताव सरकार के सामने रखा है. भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) उत्तर-पश्चिम सब जोनल ब्यूरो की ओर से जारी बयान में शांति वार्ता के लिए तैयार होने की बात कहते हुए इसके लिए अनुकूल माहौल बनाए जाने की जरूरत बताई है. उन्होंने इस पेशकश का मुख्य उद्देश्य बस्तर में हो रहे हिंसा (हत्याकांड) तुरंत रोकना बताया है.

सप्ताहभर पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरे से पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) केंद्रीय समिति की ओर से तेलगु में जारी बयान के जरिए शांति वार्ता का प्रस्ताव दिया गया था. इसके बाद अब भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) उत्तर-पश्चिम सब जोनल ब्यूरो की ओर हिन्दी में शांति वार्ता का प्रस्ताव दिया गया है. ताजा बयान में पूर्व में दिए गए बयान का जिक्र करते हुए कहा कि वार्ता के लिए अनुकूल माहौल बनाने की मांग को गृह मंत्री विजय शर्मा ने ठुकरा दिया था. इससे जाहिर है कि सरकार अपनी वर्तमान नीति को जारी रखना चाहती है.

इसके साथ ही सरकार की आत्मसमर्पण की नीति को समस्या के पूर्ण समाधान बताए जाने का भी विरोध किया गया है. माओवादियों ने कहा कि शांति वार्ता की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने संबंधित निर्णय लेने के लिए हम कुछ नेतृत्वकारी साथियों से मिलना है. स्थानीय नेतृत्व का राय लेना भी जरूरी है. लगातार चल रहे अभियानों के बीच में यह सब नहीं हो पाएगा. ऐसे में अनुकूल माहौल के लिए कगार अभियान को रोकना जरूरी है, वार्ता का प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाने के लिए अनुकूल माहौल बनाना जरूरी है, यह सरकार की जिम्मेदारी है।

संगठनों से सहयोग की अपील

माओवादियों ने सरकार के साथ-साथ देश के सभी जनवादी प्रेमियों बुद्धिजीवियों, मानवाधिकार संगठनों, सामाजिक संगठन व कार्यकर्ताओं, जनपक्षधर पत्रकारों से अपील की कि शांति वार्ता के लिए अनुकूल माहौल निर्मित करने की हमारी मांग के समर्थन में आगे आएं. सरकार और माओवादियों के बीच में शांति वार्ता के लिए बनी समिति के साथियों से भी अपील कर रहे हैं कि इस प्रक्रिया को आगे ले जाने का पहल करें.

नेतृत्व के भागने की बात को नकारा

बस्तर से नेतृत्व दूसरा राज्यों में भाग जाने की बात सही नहीं है. नेतृत्व अपने जिम्मेदारियों के तहत आना जाना और आंदोलन के जरूरतों के मुताबिक तबादले साधारण प्रक्रिया है, जिम्मेदारियों को छोड़कर कोई भागे नहीं. यह प्रचार मानसिक युद्ध का हिस्सा है अगर ऐसा भागने का प्रचार सच है तो हमारे एसजडसी मेंबर कामरेड रेणुका उर्फ चैते को मदद करने वाले सैकड़ों समर्थक रहने के बावजूद अस्वस्थता की स्थिति में भी अपनी जिम्मेदारियों को नहीं छोड़ी, जनता के लिए अपनी जान कुर्बान की.

विकास विरोधी स्वरूप से इंकार

माओवादी केवल यहीं नहीं रुके. उन्होंने अपने विकास विरोधी स्वरूप को साजिशन पेश करने की बात कही. साथ ही जनता के सरोकार से जुड़े शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, कुपोषण जैसी समस्याओं के हल निकालने पर जोर दिया. कुछ प्रकरणों में हुई गलती के लिए जनता से माफी मांगने की भी बात कही. इसके साथ जल-जंगल-जमीन से बेदखल कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली परियोजनाओं के विरोध की बात कही.

नक्सल साथियों से की अपील

केवल बात सरकार तक ही नहीं रुकी. सुरक्षा बल के अभियान से कैडर में मची आपाधापी का सबूत देते हुए माओवादियों ने बयान में कहा कि उत्तर – पश्चिम सब जोन के पार्टी कमेटियों, कमांडों व कमांडरों से अनुरोध है कि शांति वार्ता के लिए अनुकूल माहौल बनाने के दिशा में गतिविधियां रहनी चाहिए. यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि सरकार अभी तक हमारे मांग को नहीं मानी है, इसलिए सभी नियम और सावधानियों का सतर्कता के साथ पालन करें, हमलों का शिकार न बने. मीडिया के उकसाने वाले प्रचार एवं पुलिस अधिकारियों के उकसाने वाली बयानों का प्रभाव में न आएं.

सुरक्षाबल के जवानों से की अपील

माओवादियों ने अंत में पुलिस जवानों से अपील की कि पार्टी ने पुलिस जवानों को कभी दुश्मन के तौर पर नहीं देखते. इसे लेकर बार बार परचा-पोस्टरों के जरिए अपील जारी किए थे. जवानों को समझाया कि हम आपस में लड़ने की स्थिति पैदा की गई है. शांति वार्ता का हमारे यह प्रयास का समर्थन करें, जनता व हमारे कैडर अपने ही लोग है, पर गोली मत चलाएं.