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सरकारी राशन दुकान में सेंधमारी, ताला तोड़कर 26 क्विंटल चावल और इलेक्ट्रॉनिक कांटा ले उड़े चोर

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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

कवर्धा। जिले के पिपरिया थाना क्षेत्र के ग्राम बानो में चोरों…

स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव की जयंती पर मुख्यमंत्री साय ने किया श्रद्धापूर्वक नमन

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Shiv Mar 8, 2026 2 min read

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व लोकसभा सांसद स्वर्गीय…

छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजीपी विश्वरंजन का निधन, पटना के मेदांता अस्पताल में ली अंतिम सांस

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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विश्वरंजन का शनिवार…

अवैध प्लाटिंग पर चला प्रशासन का बुलडोजर, 1 एकड़ जमीन पर हो रहे निर्माण पर लगाई रोक

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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

रायपुर। राजधानी रायपुर में अवैध निर्माण और अवैध प्लाटिंग के…

भाजपा नेता के खेत से 8 करोड़ का अफीम जब्त, मक्के के बीच पांच एकड़ से अधिक में उगाई थी फसल

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Shiv Mar 7, 2026 2 min read

दुर्ग। दुर्ग जिले में भाजपा नेता विनायक ताम्रकार के द्वारा किए…

March 8, 2026

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31 साल पुराने अंधविश्वास से जुड़े हत्या मामले में बड़ा फैसला : हाईकोर्ट ने बदला ट्रायल कोर्ट का निर्णय, सभी आरोपियों को सुनाई उम्रकैद की सजा

बिलासपुर। 31 साल पुराने अंधविश्वास से जुड़े हत्या के मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट का फैसला पलट दिया। अदालत ने साफ कहा कि केवल इसलिए आरोपी बरी नहीं किए जा सकते कि पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर की गवाही पेश नहीं हुई, क्योंकि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 32(2) के तहत पोस्टमार्टम रिपोर्ट बिना डॉक्टर की गवाही के भी स्वीकार्य है, यदि अन्य सबूत मजबूत हों। हाईकोर्ट ने इसे ट्रायल कोर्ट की कानूनी भूल बताया और सभी आरोपियों को धारा 302/149 के तहत दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।

दरअसल मामला 5 फरवरी 1994 का है, जब महासमुंद जिले के बनियाटोरा गांव में एक ग्रामीण युवक रतन को भूत-प्रेत का साया होने की बात कहकर गांव में झाड़-फूंक की गई थी। इसी दौरान आरोप लगा कि मृतक और उसकी बहू डायन है। अगले ही दिन गांव के कई लोग हथियार लेकर मृतक के घर पहुंच गए। मृतक की पत्नी, बेटे और बहू की पिटाई के बाद भीड़ ने मृतक को घसीटकर बाड़ी में ले जाकर बेरहमी से मार डाला। घटना में घायल मृतक का बेटा, पत्नी और पिता सभी ने कोर्ट में बयान दिया कि आरोपी 10 से ज्यादा थे, हथियारबंद थे और मृतक को जान से मारने की नीयत से आए थे।

जांच में बरामद हथियारों पर खून के निशान भी पाए गए, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने केवल इस आधार पर आरोपियों को हत्या के मामले से बरी कर दिया कि पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर का कोर्ट में गवाही नहीं आया। हाईकोर्ट ने कहा कि घायल गवाहों की गवाही मजबूत है, बरामद हथियारों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से घटना सिद्ध होती है और डॉक्टर का बयान न होना हत्या को नकारने का आधार नहीं। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की दलील को मनमाना बताते हुए कहा कि इससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित हुई। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला बदलते हुए सभी आरोपियों को हत्या का दोषी करार दिया और उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही एक महीने के भीतर अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया है। नहीं करने पर पुलिस को गिरफ्तारी का निर्देश दिया है।