Special Story

कोटवार के पद पर खानदानी हक नहीं, योग्यता और चरित्र ही अहम…

कोटवार के पद पर खानदानी हक नहीं, योग्यता और चरित्र ही अहम…

Shiv Mar 12, 2026 2 min read

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोटवारों की नियुक्ति को लेकर कहा है…

नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बस्तर अब विकास की तेज उड़ान के लिए तैयार : मंत्री रामविचार नेताम

नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बस्तर अब विकास की तेज उड़ान के लिए तैयार : मंत्री रामविचार नेताम

Shiv Mar 12, 2026 5 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज कृषि एवं अनुसूचित जनजाति विकास…

पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति : बंद खाते या आधार सीडिंग न होने से अटकी है छात्रवृत्ति तो 15 मार्च तक सुधरवाने का मौका

पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति : बंद खाते या आधार सीडिंग न होने से अटकी है छात्रवृत्ति तो 15 मार्च तक सुधरवाने का मौका

Shiv Mar 12, 2026 2 min read

रायपुर। भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित…

समुचित वित्तीय प्रबंधन के लिए हमारी सरकार दृढ़ संकल्पित : वित्त मंत्री ओपी चौधरी

समुचित वित्तीय प्रबंधन के लिए हमारी सरकार दृढ़ संकल्पित : वित्त मंत्री ओपी चौधरी

Shiv Mar 12, 2026 10 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज वित्त मंत्री ओपी चौधरी के…

March 12, 2026

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

शराब घोटाला : पूर्व IAS अनिल टुटेजा और उनके बेटे को हाईकोर्ट से मिली राहत, जानिए पूरा मामला…

बिलासपुर- प्रदेश में हुए कथित शराब घोटाला मामले में पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा और उनके पुत्र यश टुटेजा को हाईकोर्ट से राहत मिली है. शराब घोटाला मामले में एफ़आइआर दर्ज कर एसीबी / ईओडब्लू जांच कर रही है. आज सुनवाई के दौरान एसीबी/ईओडब्ल्यू ने जवाब पेश करने कोर्ट से समय मांगा, जिस पर कोर्ट ने 2 हफ्ते का समय दिया, तब तक याचिकाकर्ता अनिल टुटेजा और उनके पुत्र यश टुटेजा के विरुध्द Acb/Eow की किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई है. हालांकि एसीबी/ईओडब्ल्यू की जांच जारी रहेगी. मामले की सुनवाई जस्टिस एनके चंद्रवंशी की कोर्ट में हुई.

बता दें कि छत्तीसगढ़ में भूपेश सरकार के समय कथित शराब घोटाला मामला सामने आया था. ईडी ने इस मामले में कार्यवाही की और यह पाया कि राज्य सरकार की सरकारी दुकानों से ही नक़ली होलोग्राम वाली शराब बेची गईं. ईडी के अनुसार इस घोटाले में अनवर ढेबर ने अरुण पति त्रिपाठी के साथ मिलकर एक संगठित गिरोह संचालित किया, जिसके प्रभाव के आगे पूरा सरकारी तंत्र (आबकारी विभाग) बेबस था.

ईडी के अनुसार, इस मामले के किंगपिन अनवर ढेबर को असीमित ताक़त भूपेश सरकार में प्रभावशाली अधिकारी अनिल टुटेजा से मिलती थी. इस मामले में ईडी ने गिरफ़्तारी की कार्रवाई शुरू की तो सुप्रीम कोर्ट से इस मसले पर आदेश जारी हुआ कि ईडी इस मसले पर कोई कार्रवाई किसी भी रुप में नहीं करेगी.