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Shiv Mar 9, 2026 2 min read

बिलासपुर। जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से…

निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुनी गईं लक्ष्मी वर्मा और फूलोदेवी नेताम, विधानसभा पहुंचकर लिया प्रमाण पत्र, समर्थकों ने दी बधाई

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रायपुर। छत्तीसगढ़ से भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस प्रत्याशी फूलोदेवी…

अस्पताल परिसर में लगी भीषण आग, आधा दर्जन कंडम एंबुलेंस समेत अन्य वाहन जलकर खाक

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Shiv Mar 9, 2026 1 min read

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में…

बिलासपुर में अवैध हुक्का बार पर पुलिस की दबिश, होटल मैनेजर गिरफ्तार

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Shiv Mar 9, 2026 2 min read

बिलासपुर। जिले में अवैध रूप से संचालित हुक्का बार पर…

March 9, 2026

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1 जुलाई से छत्तीसगढ़ में महंगी हो जाएगी जमीनें…

रायपुर।  छत्तीसगढ़ में जमीन की कीमतें जल्द ही बढ़ने वाली हैं. सूत्रों के मुताबिक, 1 जुलाई 2025 से जमीन की नई गाइडलाइन दरें लागू की जाएंगी. पंजीयन विभाग के सूत्रों का कहना है कि नई गाइडलाइन दरों के लागू होने के बाद पूरे राज्य में जमीन की कीमतों में कम से कम 10-15% और कुछ क्षेत्रों में 20-25% तक की वृद्धि हो सकती है. सर्वेक्षण के दौरान अधिकारियों ने विभिन्न क्षेत्रों में जमीन के प्रचलित मूल्यों का आकलन किया है, जिसके आधार पर नई दरें तय की जाएंगी. रायपुर के 50 किलोमीटर के दायरे में जमीन की कीमतें सबसे अधिक बढ़ने की संभावना है.

पंजीयन विभाग ने प्रदेश के 33 जिलों में जमीन की मौजूदा बाजार दरों का सर्वेक्षण पूरा कर लिया है और अब क्षेत्रवार व जिलेवार मूल्य विश्लेषण किया जा रहा है. पिछले कुछ महीनों में सर्वे में देरी के कारण नई दरें लागू करने में थोड़ा विलंब हुआ है. खास बात यह है कि राज्य में आठ साल बाद जमीन की गाइडलाइन दरों में बदलाव होने जा रहा है.

नई गाइडलाइन दरों से सबसे अधिक फायदा किसानों को होगा. छत्तीसगढ़ में अधिकांश जमीनें किसानों के पास हैं. वर्तमान में सरकार द्वारा जमीन अधिग्रहण का मुआवजा मौजूदा गाइडलाइन दरों के आधार पर दिया जाता है, जबकि सड़क से सटी किसानों की जमीनों की वास्तविक कीमत गाइडलाइन से कई गुना अधिक है. नई दरें लागू होने के बाद सरकार को अधिग्रहण के लिए बढ़ी हुई दरों के हिसाब से मुआवजा देना होगा, जिससे किसानों को आर्थिक लाभ होगा.

जमीन के सौदों में अक्सर बड़े बिल्डर और डेवलपर गाइडलाइन दरों के बजाय अपनी मनमानी कीमत वसूलते हैं और अंतर की राशि नकद (कच्चे) में लेते हैं. इससे जमीन की वास्तविक कीमत को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है. नई दरें लागू होने से इस प्रथा पर अंकुश लगेगा, क्योंकि बढ़ी हुई गाइडलाइन दरें बाजार मूल्य के करीब होंगी, जिससे काले धन का लेन-देन कम होगा.

पिछले वित्तीय वर्ष में छत्तीसगढ़ को पंजीयन से 2,900 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है. उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र को पंजीयन से 40,000 करोड़, कर्नाटक को 30,000 करोड़ और मध्य प्रदेश के अकेले इंदौर शहर से 3,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है. नई गाइडलाइन दरें लागू होने से छत्तीसगढ़ में पंजीयन से मिलने वाले राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है. यदि औसतन 20 प्रतिशत की वृद्धि होती है, तो सरकार के खजाने में अतिरिक्त राशि आएगी, क्योंकि रजिस्ट्री अब बढ़ी हुई दरों पर होगी.