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स्कूल टाइमिंग में बदलाव का संयुक्त शिक्षक संघ ने दर्ज कराया विरोध

रायपुर। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा हाल ही में जारी की गई नई समय-सारणी को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ ने तीव्र विरोध दर्ज कराया है। विशेष रूप से शनिवार के दिन स्कूल का समय सुबह से बदलकर 10 बजे से 4 बजे तक किए जाने और प्राथमिक शालाओं में भोजन अवकाश को दोपहर 1.45 बजे निर्धारित करने के फैसले को संगठन ने अनुचित बताया है।

संयुक्त शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष केदार जैन ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए कहा कि शनिवार को सुबह के समय विद्यालय लगाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जिसे एक प्रशासनिक आदेश से समाप्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शनिवार को योगाभ्यास, नैतिक शिक्षा जैसे गतिविधियों के लिए प्रातः कालीन समय सबसे उपयुक्त होता है, जो बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए आवश्यक है।

छोटे बच्चों के लिए भोजन अवकाश में बदलाव अव्यवहारिक

केदार जैन ने आगे कहा कि प्राथमिक शालाओं में भोजन अवकाश का समय दोपहर 1.45 बजे किए जाने का भी संगठन विरोध करता है। उनका कहना है कि छोटे बच्चे सुबह 8 बजे के आसपास भोजन करके स्कूल आते हैं। ऐसे में उन्हें 12 बजे तक भूख लगना स्वाभाविक है। अगर भोजन अवकाश देर से रखा जाएगा तो इससे बच्चों की पढ़ाई पर भी असर पड़ेगा।

शिक्षकों और बच्चों दोनों को हो रही परेशानी

संगठन के नेताओं का कहना है कि पहले से ही युक्तियुक्तकरण (Rationalisation) और अन्य व्यवस्थागत बदलावों से शिक्षक वर्ग मानसिक रूप से दबाव में है। अब समय-सारणी में इस तरह का बदलाव बच्चों और शिक्षकों दोनों के लिए असुविधाजनक है।

संयुक्त बयान में शासन से की मांग

इस मुद्दे पर संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों ममता खालसा, ओमप्रकाश बघेल, गिरिजाशंकर शुक्ला, अर्जुन रतनाकर, माया सिंह, ताराचंद जयसवाल, नरोत्तम चौधरी, रूपानंद पटेल, विजय राव, सुभाष शर्मा, सोहन यादव, शहादत अली, बसंत जायसवाल, राकेश शुक्ला, हरीश सिन्हा और अमित दुबे ने संयुक्त बयान जारी करते हुए शासन से अनुरोध किया है कि डीपीआई द्वारा जारी समय-सारणी को तत्काल संशोधित किया जाए।

उन्होंने मांग की है कि शनिवार को पुनः सुबह के समय विद्यालय संचालन किया जाए और प्राथमिक शालाओं के लिए भोजन अवकाश दोपहर 1 बजे तक रखा जाए, जिससे बच्चों और शिक्षकों की दिनचर्या संतुलित बनी रहे।