Special Story

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 14 मार्च को बिलासपुर से करेंगे “गौधाम योजना” का शुभारंभ

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 14 मार्च को बिलासपुर से करेंगे “गौधाम योजना” का शुभारंभ

Shiv Mar 13, 2026 3 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में निराश्रित और घुमंतू गौवंश…

पट्टीकल्याणा में आरएसएस की तीन दिवसीय प्रतिनिधि सभा शुरू, देशभर से 1400 प्रतिनिधि शामिल

पट्टीकल्याणा में आरएसएस की तीन दिवसीय प्रतिनिधि सभा शुरू, देशभर से 1400 प्रतिनिधि शामिल

Shiv Mar 13, 2026 5 min read

पट्टीकल्याणा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की…

EOW-ACB ने बैंक घोटाले में चालान पेश किया, ढाई करोड़ गबन की जांच जारी

EOW-ACB ने बैंक घोटाले में चालान पेश किया, ढाई करोड़ गबन की जांच जारी

Shiv Mar 13, 2026 2 min read

रायपुर। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एन्टी करप्शन ब्यूरो ने…

छत्तीसगढ़ विधानसभा में उच्च शिक्षा विभाग की 1306 करोड़ से अधिक की अनुदान मांगें पारित

छत्तीसगढ़ विधानसभा में उच्च शिक्षा विभाग की 1306 करोड़ से अधिक की अनुदान मांगें पारित

Shiv Mar 13, 2026 4 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम…

ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

Shiv Mar 13, 2026 3 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ देश की अर्थव्यवस्था का पावर इंजन है और…

मंत्री टंक राम वर्मा के राजस्व विभाग की 3502 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें विधानसभा में पारित

मंत्री टंक राम वर्मा के राजस्व विभाग की 3502 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें विधानसभा में पारित

Shiv Mar 13, 2026 4 min read

रायपुर।  छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा…

March 13, 2026

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

किसानों की आयवृद्धि, कीटनाशक नियंत्रण और जैविक खेती के लिए सांसद बृजमोहन अग्रवाल की पहल

नई दिल्ली/रायपुर।  रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने आज लोकसभा में प्राक्कलन समिति (2024-25) का छठा प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। यह प्रतिवेदन “कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) के माध्यम से जलवायु अनुकूलनशील कृषि, प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा” विषय पर केंद्रित है।

श्री अग्रवाल ने बताया कि प्रतिवेदन में कृषि क्षेत्र में नवाचार, स्थायित्व और किसानों की आयवृद्धि को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं। प्रमुख बिंदुओं में कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग पर चिंता, जैविक कीटनाशकों के व्यापक उपयोग की आवश्यकता, और 1968 के कीटनाशक अधिनियम के तहत प्रवर्तन को सशक्त बनाने की सिफारिशें शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि समिति ने KVKs की संरचनात्मक मजबूती और वित्तीय सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता पर बल दिया है, जिससे किसानों तक उन्नत तकनीकें, प्रशिक्षण और डिजिटल माध्यमों से जानकारी प्रभावी रूप से पहुँच सके।

श्री अग्रवाल ने बताया कि देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों में 30% स्टाफ की भारी कमी पर समिति ने गहरी चिंता जताई है और रिक्तियों को शीघ्र भरने हेतु विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता बताई है। साथ ही, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सटीक कृषि और बहु-कौशल विशेषज्ञों की नियुक्ति पर भी बल दिया गया है।

जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए चलाए जा रहे NICRA कार्यक्रम की सीमित पहुँच पर भी समिति ने चिंता व्यक्त की है और इसे चरणबद्ध तरीके से सभी अति संवेदनशील जिलों तक पहुँचाने के लिए अतिरिक्त बजट की सिफारिश की है।

प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में, समिति ने एक मानकीकृत लेकिन लचीले प्रोटोकॉल को विकसित करने, प्रशिक्षण बढ़ाने, और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों तक इसे विस्तारित करने की बात कही है।

श्री अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान में किसानों को दी जा रही आर्थिक सहायता को अपर्याप्त मानते हुए समिति ने DBT प्रोत्साहनों को बढ़ाने, सहायता अवधि को तीन वर्षों से आगे बढ़ाने, और जैविक उत्पादों की मार्केटिंग और प्रीमियम प्राइसिंग को प्रोत्साहित करने की सिफारिश की है।

इसके अतिरिक्त, समिति ने छोटे किसानों के लिए प्रमाणन प्रक्रिया को सरल, सुलभ और कम लागत वाली बनाने, एकीकृत जैविक लेबल स्थापित करने, और डिजिटल प्रमाणन व्यवस्था को लागू कर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई है।

भंडारण क्षमताओं को लेकर समिति ने PPP मॉडल में नियंत्रित वातावरण प्याज भंडारण और मल्टी-प्रोडक्ट स्टोरेज को दोहराने की सलाह दी है, जिससे खाद्य अपव्यय में कमी और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

अंत में बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि यह प्रतिवेदन देश के किसानों को सशक्त बनाने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और कृषि को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने आशा जताई कि सरकार इस प्रतिवेदन की सिफारिशों पर शीघ्र अमल करेगी।