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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

कवर्धा। जिले के पिपरिया थाना क्षेत्र के ग्राम बानो में चोरों…

स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव की जयंती पर मुख्यमंत्री साय ने किया श्रद्धापूर्वक नमन

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Shiv Mar 8, 2026 2 min read

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व लोकसभा सांसद स्वर्गीय…

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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विश्वरंजन का शनिवार…

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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

रायपुर। राजधानी रायपुर में अवैध निर्माण और अवैध प्लाटिंग के…

भाजपा नेता के खेत से 8 करोड़ का अफीम जब्त, मक्के के बीच पांच एकड़ से अधिक में उगाई थी फसल

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Shiv Mar 7, 2026 2 min read

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March 8, 2026

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नाथू ला में भारतीय सेना के शौर्य का साक्षात्कार: छत्तीसगढ़ मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने ‘रणभूमि’ प्रोजेक्ट की जमीनी हकीकत देखी

रायपुर।  भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), रायपुर द्वारा आयोजित विशेष अध्ययन दौरे के तहत छत्तीसगढ़ के 10 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नाथू ला दर्रे का भ्रमण किया। इस यात्रा का उद्देश्य केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘रणभूमि’ परियोजना की जमीनी स्थिति को समझना और सीमावर्ती क्षेत्रों के ऐतिहासिक, सामरिक एवं पर्यटन महत्व से परिचित होना था।

‘रणभूमि’ प्रोजेक्ट के माध्यम से सरकार का लक्ष्य सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारतीय सेना के शौर्य, बलिदान और गौरवशाली इतिहास को आमजन तक पहुंचाना है। यह पहल न केवल प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर इन क्षेत्रों को पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाएगी, बल्कि उन वीर गाथाओं को भी पुनर्जीवित करेगी, जो अक्सर इतिहास के पन्नों में दबकर रह जाती हैं।

दौरे के दौरान पत्रकारों ने अत्यधिक ऊंचाई और कठोर मौसम में तैनात भारतीय सैनिकों के जीवन की कठिन परिस्थितियों का प्रत्यक्ष अनुभव किया। नाथू ला में तापमान शून्य से माइनस 5 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है और ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण सामान्य गतिविधियां भी चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं।

सामरिक दृष्टि से नाथू ला भारत और चीन के बीच सीमा सुरक्षा तथा कूटनीतिक संवाद का महत्वपूर्ण केंद्र है। प्रतिनिधिमंडल को दोनों देशों के बीच शांति बनाए रखने के लिए आयोजित होने वाली बॉर्डर पर्सनल मीटिंग (बीपीएम) की जानकारी दी गई, जो वर्ष में आठ बार होती है। इनमें से पांच बैठकों की मेजबानी भारत करता है, जबकि तीन चीन द्वारा आयोजित की जाती हैं।

यात्रा के दौरान पत्रकारों को 1967 के ऐतिहासिक नाथू ला संघर्ष की वीरगाथा से भी अवगत कराया गया। जाट रेजिमेंट के कैप्टन देव शर्मा ने बताया कि यह दर्रा कभी भारत, तिब्बत और चीन के बीच प्रमुख सिल्क रूट व्यापार मार्ग हुआ करता था। 1967 में, जब भारतीय सैनिक सीमा पर कंटीले तारों की बाड़ लगा रहे थे, तब चीनी सेना द्वारा अचानक हमला किया गया। इसके जवाब में भारतीय सेना ने साहस और रणनीतिक कौशल का परिचय देते हुए निर्णायक कार्रवाई की, जिसमें बड़ी संख्या में चीनी सैनिक हताहत हुए। इस विजय ने सीमा की सुरक्षा को मजबूती दी और लंबे समय तक शांति स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई।

मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने इस दौरे को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि नाथू ला और ‘रणभूमि’ प्रोजेक्ट जैसे प्रयास देशभक्ति, इतिहास और पर्यटन के अद्भुत संगम का उदाहरण हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करेंगे।