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सुरक्षाबल के साथ चल रही निर्णायक लड़ाई के बीच नक्सलियों ने फिर लगाई शांति वार्ता की गुहार, मान लिया कि बंदूक के दम पर नहीं लाई जा सकती बस्तर में शांति…

जगदलपुर। बीते 85 घंटों से बीजापुर के कर्रेगट्टा की पहाड़ियों में चल रही एक निर्णायक लड़ाई में सुरक्षाबलों के द्वारा नक्सलियों को चौतरफा घेरा जा चुका है. मोर्चे पर हिड़मा, देवा और विकास जैसे खतरनाक नक्सली कमांडरों के फंसे होने की सूचना के बीच नक्सली संगठन ने एक बार फिर सरकार से शांति वार्ता की गुहार लगाई है.

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) उत्तर-पश्चिम सब जोनल ब्यूरो के प्रभारी रूपेश की ओर से जारी पत्र में सबसे पहले बीजापुर-तेलंगाना सीमा पर तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और छत्तीसगढ़ में तैनात सुरक्षाबल की संयुक्त कार्रवाई को तुरंत रोकने की मांग करते हुए सरकार से शांति वार्ता के लिए आगे आने की अपील की है.

ब्यूरो के चिट्ठी में रूपेश ने साफ तौर पर कहा है कि बस्तर में बंदूक के दम पर शांति नहीं लाई जा सकती. उनका कहना है कि उन्होंने पहले ही शांति वार्ता के लिए माहौल बनाने की मांग की थी, लेकिन सरकार की ओर से इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई.

चिट्ठी में हाल ही में शुरू हुए कागार ऑपरेशन का भी ज़िक्र किया गया है, जिस पर रूपेश ने लिखा है कि छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की संयुक्त कार्रवाई वार्ता के माहौल को नुकसान पहुंचा रही है. इसके साथ उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि एक ओर बातचीत की बात होती है, तो दूसरी ओर जंगलों में फोर्स भेज दी जाती है. रूपेश का दावा है कि वे शांति वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार की मंशा कुछ और ही दिख रही है. अंत में लिखा गया है कि वे सरकार के जवाब का इंतज़ार कर रहे हैं.

चौतरफा घिरे हैं नक्सली

बता दें कि बीते 85 घंटों से बीजापुर के कर्रेगट्टा की पहाड़ियों में एक बड़ा ऑपरेशन जारी है. ये ऑपरेशन तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और छत्तीसगढ़ की संयुक्त टीम द्वारा चलाया जा रहा है. पहाड़ी की चोटी पर हिड़मा, देवा और विकास जैसे खतरनाक नक्सली कमांडर मौजूद हैं और उनके साथ कंपनी नंबर-1 की पूरी टीम तैनात है. सुरक्षाबलों ने करीब सात किलोमीटर में पूरे इलाके को घेर रखा है और ऑपरेशन बेहद रणनीतिक ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है.

नक्सलियों तक ट्रैक्टर से पहुंचा राशन

गर्मी के चलते हालात चुनौतीपूर्ण हैं. जवानों तक एयरलिफ्ट के जरिए राशन पहुंचाया जा रहा है, वहीं पहाड़ियों पर डटे नक्सलियों को भी राशन की कमी से जूझना पड़ रहा है. हालांकि, एक अहम जानकारी ये भी सामने आई है कि ऑपरेशन शुरू होने से पहले नक्सलियों तक एक ट्रैक्टर के जरिए राशन पहुंचाया जा चुका था, जिससे उनकी स्थिति थोड़ी मजबूत हुई है.

तीन नक्सलियों से शव हुए बरामद

अब तक इस ऑपरेशन में तीन नक्सलियों के शव बरामद किए जा चुके हैं, लेकिन अब तक इस पूरे अभियान पर पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है. बीजापुर में तीन हेलीपैड्स को अलर्ट पर रखा गया है. वहीं खबर है कि छत्तीसगढ़ के डीजी और राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा जल्द ही बीजापुर पहुंच सकते हैं. इस दौरान कई जवानों के डिहाइड्रेशन का शिकार होने की भी खबरें आई हैं, जिन्हें एयरलिफ्ट कर इलाज के लिए भद्राचलम भेजा गया है.

मोर्चे पर तैनात हैं सिद्धहस्त जवान

इस ऑपरेशन को बस्तर की निर्णायक लड़ाई माना जा रहा है. लंबे समय से इसकी तैयारी चल रही थी खास जवानों का चयन किया गया था जो पहाड़ी और घने जंगलों के इस मुश्किल इलाके में युद्ध जैसी स्थिति से निपट सकें. सवाल अब यही है क्या बस्तर में आख़िरकार शांति आएगी? या फिर ये जंग और लंबी खिंचने वाली है? सरकार की नीति और नक्सलियों की मंशा के बीच अब बस्तर की तकदीर तय होगी.