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हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला : केवल प्रक्रियात्मक त्रुटियों के आधार पर अमान्य नहीं किया जा सकता मुकदमा, गांजा तस्कर की 20 साल की सजा को रखा बरकरार

बिलासपुर। हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि यदि ठोस साक्ष्य मौजूद हैं, तो केवल प्रक्रियात्मक त्रुटियों के आधार पर मुकदमा अमान्य नहीं किया जा सकता. इसके साथ ही कोर्ट ने गांजा तस्करी के दोषी की 20 साल के कठोर कारावास व 2 लाख के जुर्माने की सजा को बरकरार रखा है. 

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में गांजा तस्करी के मामले में मिली सजा के खिलाफ दोषियों की अपील पर सुनवाई हुई. बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि एनडीपीएस नियम 10 और 11 के अनुपालन में कमी और एनडीपीएस अधिनियम की धारा 52-ए का पालन करने में देरी से मुकदमा अमान्य नहीं होता. यदि प्रतिबंधित मादक पदार्थ (गांजा) की बरामदगी सिद्ध हो चुकी है, तो सजा उचित है.

बता दें कि 5 जनवरी 2020 को एएसआई एचएन ताम्रकार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जांजगीर-चाम्पा जिले के पामगढ़ में वाहनों की नियमित जांच कर रही थी. इस दौरान शिवरीनारायण से आ रही ओडिशा पासिंग चार पहिया गाड़ी को रुकने का इशारा किया. चालक ने वाहन रोकने के बजाय गति बढ़ा दी. संदेह होने पर पुलिस ने वाहन का पीछा किया और भारतीय स्टेट बैंक, पामगढ़ शाखा के सामने उसे रोक लिया.

तलाशी लेने पर गाड़ी से 217 पैकेटों में 222.8 किलोग्राम गांजा मिला, जिसे काले कंबल के नीचे छुपाया गया था. वाहन चालक शाहबाज अहमद शेख को मौके पर गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि उसका साथी अजय सिंह बघेल फरार हो गया. विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस अधिनियम), जांजगीर-चांपा ने एनडीपीएस अधिनियम की धारा 20(बी)(ii)(सी) के अंतर्गत आरोपी शाहबाज अहमद शेख को दोषी ठहराते हुए 20 साल की कठोर सजा और 2 लाख रुपए का जुर्माना लगाया. इस सजा के खिलाफ दोषी शाहबाज ने हाई कोर्ट में अपील की थी.