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March 9, 2026

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आईएमए बैठक में बड़ा फैसला, भुगतान नहीं हुआ तो आयुष्मान मरीजों का इलाज मुश्किल

रायपुर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की बैठक 24 जनवरी को पं. जेएनएम मेडिकल कॉलेज रायपुर के लेक्चर हॉल में आयोजित की गई। बैठक में आयुष्मान भारत योजना (पीएमजेएवाई) के तहत निजी अस्पतालों के लंबित भुगतान, योजना की दरों के पुनर्निधारण और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

आईएमए ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि राज्य शासन द्वारा 10 दिनों के भीतर आयुष्मान योजना के अंतर्गत निजी अस्पतालों का लंबित भुगतान नहीं किया गया, तो प्रदेश के निजी अस्पताल इस योजना के तहत मरीजों का इलाज करने में असमर्थ होंगे।

बैठक में छत्तीसगढ़ आईएमए के अध्यक्ष डॉ. अनूप वर्मा, बिल्डिंग कमेटी के अध्यक्ष डॉ. कमलेश्वर अग्रवाल, रायपुर आईएमए के अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सोलंकी, सचिव डॉ. संजीव श्रीवास्तव, हॉस्पिटल बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सुरेन्द्र शुक्ला सहित अन्य पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।

आईएमए पदाधिकारियों ने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि पिछले पांच महीनों से निजी अस्पतालों के आयुष्मान योजना का भुगतान लंबित है, जिससे छोटे और मझोले अस्पतालों के संचालन में गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। बैठक में आयुष्मान योजना की वर्तमान दरों के पुनर्निधारण की मांग पर भी सर्वसम्मति बनी। एसोसिएशन का कहना है कि चिकित्सा उपकरणों, दवाइयों, उपभोग्य सामग्रियों, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ के वेतन सहित अन्य खर्चों में भारी वृद्धि हुई है, जिसके चलते मौजूदा दरों पर उपचार करना संभव नहीं रह गया है।

इसके अलावा, आईएमए ने अस्पतालों और क्लीनिकों में लागू बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन प्रक्रिया और यूजर चार्ज की दरों को अव्यवहारिक बताया। संगठन ने कहा कि छोटे क्लीनिकों से भी हर महीने 15 से 20 हजार रुपये तक यूजर चार्ज वसूला जा रहा है, जो पूरी तरह अनुचित है। आईएमए का आरोप है कि रायपुर, दुर्ग और भिलाई में बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण के लिए एक ही एजेंसी का एकाधिकार है, जिसके कारण मनमाने शुल्क वसूले जा रहे हैं और नियमित रूप से प्रतिदिन वेस्ट का निस्तारण भी नहीं किया जा रहा।
बैठक में आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों की संबद्धता के लिए लागू एचईएम पोर्टल की गाइडलाइन पर भी आपत्ति जताई गई। चिकित्सकों ने बताया कि 20 बिस्तर वाले अस्पताल के लिए तीन एमबीबीएस डॉक्टर की अनिवार्यता जैसी शर्तें छोटे और मझोले अस्पतालों के लिए अव्यवहारिक हैं। पोर्टल के कई अन्य दिशा-निर्देशों को भी लागू करना लगभग असंभव बताया गया।

विस्तृत चर्चा के बाद आईएमए ने राज्य शासन से सभी मांगों और समस्याओं का निश्चित समय-सीमा में समाधान करने की मांग की, ताकि प्रदेश के अस्पतालों का सुचारू और प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जा सके।