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सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र में टकराव: परिवहन व्यवस्था पर संघ के कब्जे की कोशिश, उद्योगपति असहज, दबाव की राजनीति के आरोप

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Shiv Mar 19, 2026 3 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ औद्योगिक परिवहन कल्याण संघ अपनी पांच सूत्रीय मांगों को…

हाईकोर्ट ने कुम्हार की आजीविका रोकने वाले नायब तहसीलदार के आदेश पर लगाया स्टे, कलेक्टर से मांगा जवाब

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Shiv Mar 19, 2026 2 min read

बिलासपुर। आजीविका रोके जाने के मामले में सुनवाई कर हाईकोर्ट ने…

सेप्टिक टैंक मौत मामले में राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग ने लिया संज्ञान, रायपुर पहुंचे उपाध्यक्ष हरदीप सिंह

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Shiv Mar 19, 2026 1 min read

रायपुर। राजधानी में रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल के गटर सीवरेज टैंक से में…

हाईकोर्ट का पुलिस आरक्षक भर्ती मामले में बड़ा फैसला, वेटिंग लिस्ट से भरे जाएंगे जॉइनिंग के बाद रिक्त पद

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Shiv Mar 19, 2026 2 min read

बिलासपुर। पुलिस आरक्षक भर्ती मामले में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते…

सदन में विनियोग विधेयक पारित : नेता प्रतिपक्ष महंत ने कहा- राज्य और केंद्र के बीच पीस रही जनता, वित्त मंत्री ओपी बोले- 

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Shiv Mar 19, 2026 4 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में बुधवार को विस्तृत चर्चा के बाद वित्तीय वर्ष 2026-27…

पत्रकारों के मुद्दों पर बनेगी कार्ययोजना, विजयवाड़ा में आईजेयू का बड़ा आयोजन

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Shiv Mar 18, 2026 2 min read

हैदराबाद/चंडीगढ़। इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन (आईजेयू) का 11वां राष्ट्रीय सम्मेलन 28-29…

March 19, 2026

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धान खरीदी में मनमानी पर हाईकोर्ट सख्त, किसान का बकाया 84 क्विंटल धान लेने का दिया निर्देश

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने स्टॉक जांच में धान नहीं होने की बात कहते हुए किसान का पूरा धान नहीं लेने के खिलाफ पेश याचिका में कलेक्टर सक्ती, हसौद मंडी सहित अन्य को याचिकाकर्ता का बकाया 84 क्विंटल धान 30 दिवस के अंदर लेने का आदेश दिया है. कोर्ट ने इसके साथ याचिका को निराकृत किया है. मामले की सुनवाई जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की सिंगल बेंच में हुई.

याचिकाकर्ता लक्ष्मण कुमार चंद्रा निवासी ग्राम हसौद, जिला सक्ती ने अधिया के आधार पर खेती की. कटाई के बाद, शेष 84 क्विंटल धान बटाईदार के घर भंडार में रखा गया था. भंडार के भौतिक सत्यापन की तारीख 20.01.2026 को, 84 क्विंटल धान याचिकाकर्ता के सीधे कब्जे में नहीं पाया गया, जिसके कारण समिति प्रबंधक/अध्यक्ष, कृषक सेवा सहकारी समिति अध्यक्ष, कृषक सेवा सहकारी समिति मर्यादित, हसौद ने उक्त धान की खरीद से इनकार कर दिया. इसके खिलाफ किसान ने अधिवक्ता योगेश कुमार चंद्रा के जरिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई. जिसमें कहा गया, कि याचिकाकर्ता एक किसान है, जिसने खरीफ साल 2025-26 के लिए उसकी 3.7800 हेक्टेयर खेती की ज़मीन किसान पोर्टल पर रजिस्टर्ड थी. 196 क्विंटल धान की खरीद के लिए सहकारी समिति हसौद ने याचिकाकर्ता को 196 क्विंटल का टोकन भी जारी किया था. किसान ने 111.20 क्विंटल धान बेचा है. याचिकाकर्ता का शेष 84 क्विंटल धान लिए जाने का निर्देश दिए जाने की मांग की गई.

जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी ने याचिकाकर्ता एवं प्रतिवादियों का पक्ष सुनने के बाद अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड के अवलोकन से पता चलता है कि याचिकाकर्ता की खरीफ वर्ष 2025-26 के लिए उनकी 3.7800 हेक्टेयर कृषि भूमि किसान पोर्टल पर किसान के तहत पंजीकृत की गई थी. इसके अलावा, पिटीशनर के 196 क्विंटल धान की खरीद के लिए टोकन जारी किया गया था. हालांकि 196 क्विंटल धान की बिक्री की एंट्री किसान पोर्टल पर रजिस्टर्ड है और इसके लिए टोकन भी जारी किया गया था, लेकिन सिर्फ़ 111.20 क्विंटल ही बेचा गया है. पिटीशनर के अनुसार, एक किसान के तौर पर, उसने एक बटाईदार (बटाईदार) के साथ एक अधिया के ज़रिए 84 क्विंटल धान की कटाई की, और यह हिस्सा बटाईदार के स्टोरेज एरिया में स्टोर किया गया था. रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे पता चले कि पिटीशनर ने उस धान की कटाई गैर-कानूनी तरीके से की थी. कोर्ट ने कलेक्टर सक्ती, सहकारी समिति सहित अन्य को याचिकाकर्ता की बाकी 84 क्विंटल धान बेचने और उठाने की इजाज़त देने का निर्देश दिया है. इसके लिए सही प्रोसेस कर 30 दिनों के अंदर धान लेने का निर्देश दिया है. इसके साथ कोर्ट ने याचिका को निराकृत किया है.