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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

कवर्धा। जिले के पिपरिया थाना क्षेत्र के ग्राम बानो में चोरों…

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Shiv Mar 8, 2026 2 min read

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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

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Shiv Mar 7, 2026 2 min read

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March 8, 2026

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हाईकोर्ट ने माना स्कूल परिसर में जबरन घुसना अपराध, NSUI नेता की याचिका की खारिज

बिलासपुर। स्कूल कैंपस को ‘प्रॉपर्टी की कस्टडी की जगह’ माना जाता है, जहां स्कूल का फर्नीचर और एजुकेशनल एसेट्स रखे जाते हैं। इसलिए यह इंडियन पैनल कोड (IPC) के तहत घर में घुसने का अपराध बन सकता है। इस फैसले के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के याचिका को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट के जस्टिस जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल ने IPC की धारा 452 (चोट, हमला या गलत तरीके से रोकने की तैयारी के बाद घर में घुसना); धारा 442 (घर में घुसने की परिभाषा) और धारा 441 (क्रिमिनल ट्रेसपास) की विस्तृत व्याख्या अपने फैसले में की है।

कोर्ट ने कहा है कि इन तीनों धाराओं को मिलाकर पढ़ने से यह साफ पता चलता है कि जो कोई भी किसी बिल्डिंग, टेंट या बर्तनों में घुसकर क्रिमिनल रूप से ट्रेसपास करता है, जो इंसानों के रहने की जगह के तौर पर इस्तेमाल होती हैं या किसी ऐसी बिल्डिंग में जो पूजा की जगह या प्रॉपर्टी की कस्टडी के तौर पर इस्तेमाल होती हैं, उसे हाउस ट्रेसपास कहा जाता है। हाउस ट्रेसपास के लिए तीन अलग-अलग चीज़ें हैं यानी (i) कोई भी बिल्डिंग जो इंसानों के रहने की जगह के तौर पर इस्तेमाल होती है, (ii) कोई भी बिल्डिंग जो पूजा की जगह के तौर पर इस्तेमाल होती है और (iii) कोई भी बिल्डिंग जो प्रॉपर्टी की कस्टडी के तौर पर इस्तेमाल होती है। स्कूल की बिल्डिंग निश्चित रूप से इंसानों का रहने का घर या पूजा की जगह नहीं हो सकती, लेकिन इसे प्रॉपर्टी की कस्टडी के लिए एक जगह माना जा सकता है, जहां स्कूल का फर्नीचर और दूसरी एजुकेशनल संपत्ति सुरक्षित रखी जा रही है।

दरअसल, याचिकाकर्ता विकास तिवारी NSUI सदस्य ने कथिततौर पर अपने साथियों के साथ कृष्णा किड्स एकेडमी की जगह में घुसकर गालियां दीं और महिला स्टाफ के साथ बदतमीज़ी की। इस पर स्कूल के एडमिनिस्ट्रेटर (शिकायतकर्ता) ने ऑफिशियल शिकायत दर्ज कराई। मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ IPC की धारा 452, 294 (अश्लील हरकतें) के साथ 34 (कॉमन इंटेंशन) के तहत आरोप तय किए। ​​याचिकाकर्ता ने रिविजनल कोर्ट में ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद रिविजनल कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। इस फैसले को याचिकाकर्ता विकास तिवारी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि वह सरकारी सर्कुलर और गाइडलाइन के खिलाफ स्कूल के गैर-कानूनी संचालन का विरोध कर रहा था। धारा 452 के तहत आरोप के खिलाफ तर्क देते हुए उसने कहा कि स्कूल “रहने की जगह” की परिभाषा में नहीं आता है, इसलिए उसके खिलाफ आरोप तय नहीं किया जा सकता।

वहीं राज्य ने तर्क दिया कि स्कूल के कर्मचारियों के बयानों से साफ पता चलता है कि याचिकाकर्ता ने स्कूल परिसर में बिना इजाजत घुसकर गाली-गलौज की। कोर्ट ने आगे कहा कि आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम करने के लिए, सिर्फ पहली नज़र में सबूतों पर ही विचार किया जाना चाहिए और ट्रायल कोर्ट ने पूरी जानकारी पर विचार करने के बाद याचिकाकर्ता के खिलाफ चार्ज फ्रेम किया।

मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा, “स्कूल की बिल्डिंग पर शिकायत करने वाले का ही कब्ज़ा था और याचिकाकर्ता को शिकायत करने वाले की इजाज़त के बिना उसके कब्जे वाली जगह में ज़बरदस्ती घुसने का कोई अधिकार नहीं था।” इस तरह यह देखते हुए कि उसे धारा 452 के तहत चार्ज फ्रेम करने में कोई कमी नहीं मिली। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और रिविजनल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका को खारिज कर दी।