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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

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Shiv Mar 7, 2026 2 min read

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March 8, 2026

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सुप्रीम कोर्ट में पूर्व मंत्री कवासी लखमा और चैतन्य बघेल की याचिकाओं पर सुनवाई, EOW और ED को नोटिस जारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ के दो चर्चित मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को अहम सुनवाई हुई। पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा की जमानत याचिका और कारोबारी चैतन्य बघेल की PMLA (Prevention of Money Laundering Act) से जुड़ी याचिकाओं पर देश की सर्वोच्च अदालत ने सुनवाई करते हुए संबंधित एजेंसियों को नोटिस जारी किया है।

जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने दोनों मामलों की सुनवाई की। कोर्ट ने लखमा की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को नोटिस जारी किया है। साथ ही एजेंसी को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

पूर्व मंत्री कवासी लखमा, जो वर्तमान में भ्रष्टाचार और आर्थिक अनियमितता के एक मामले में जेल में बंद हैं, ने अपनी गिरफ्तारी को अनुचित बताते हुए जमानत की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट में उनकी ओर से देश के वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने पैरवी की। उन्होंने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि लखमा के खिलाफ दर्ज FIR और आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है तथा राजनीतिक दुर्भावना के तहत कार्रवाई की गई है।

कोर्ट ने दलीलें सुनने के बाद EOW को नोटिस जारी करते हुए कहा कि मामले के तथ्यों और जांच की स्थिति पर स्पष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। इस बीच कोर्ट ने अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की है।इसी के साथ जस्टिस सूर्यकांत की ही कोर्ट में कारोबारी चैतन्य बघेल की दो याचिकाओं पर भी सुनवाई हुई। इनमें पहली याचिका में उन्होंने ED द्वारा की गई उनकी गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने की मांग की है, जबकि दूसरी याचिका में उन्होंने PMLA कानून की वैधता को चुनौती दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों याचिकाओं पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी किया है और 10 दिनों के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इन दोनों याचिकाओं पर अगले हफ्ते पुनः सुनवाई की जाएगी। चैतन्य बघेल का मामला छत्तीसगढ़ के कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क और सरकारी ठेकों में वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा बताया जाता है। वहीं, कवासी लखमा का मामला आबकारी विभाग में गड़बड़ियों और पद के दुरुपयोग से संबंधित है।

इन दोनों प्रकरणों को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एक ओर विपक्ष इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” बता रहा है, वहीं सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से कार्य कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी होने के बाद अब दोनों मामलों में एजेंसियों की रिपोर्ट और आगामी सुनवाई का इंतजार रहेगा, जो आने वाले दिनों में इन हाई-प्रोफाइल मामलों की दिशा तय करेगी।