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Shiv Mar 9, 2026 2 min read

बिलासपुर। जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से…

निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुनी गईं लक्ष्मी वर्मा और फूलोदेवी नेताम, विधानसभा पहुंचकर लिया प्रमाण पत्र, समर्थकों ने दी बधाई

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रायपुर। छत्तीसगढ़ से भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस प्रत्याशी फूलोदेवी…

अस्पताल परिसर में लगी भीषण आग, आधा दर्जन कंडम एंबुलेंस समेत अन्य वाहन जलकर खाक

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Shiv Mar 9, 2026 1 min read

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में…

बिलासपुर में अवैध हुक्का बार पर पुलिस की दबिश, होटल मैनेजर गिरफ्तार

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Shiv Mar 9, 2026 2 min read

बिलासपुर। जिले में अवैध रूप से संचालित हुक्का बार पर…

March 9, 2026

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OBC आरक्षण पर सुनवाई : हाईकोर्ट ने सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से मांगा जवाब, हफ्तेभर का दिया समय, जानिए पूरा मामला…

बिलासपुर।  पंचायत चुनाव में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) आरक्षण को लेकर दाखिल याचिका पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. इस मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. यह याचिका ग्राम पंचायत घुटुरकुंडी, जनपद पंचायत पंडरिया, जिला कबीरधाम के निवासी हेमंत कुमार साहू ने अपने अधिवक्ताओं वैभव पी. शुक्ला और आशीष पाण्डेय के माध्यम से दायर की थी.

याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष यह मुद्दा उठाया कि पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण के निर्धारण के लिए जो संशोधित नियम बनाए गए हैं, उनमें प्रत्येक ब्लॉक में ओबीसी वर्ग की जनसंख्या के अनुपात में सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है. अधिवक्ता वैभव पी. शुक्ला ने तर्क दिया कि राज्य सरकार के पास ओबीसी जनसंख्या के सही आंकड़े उपलब्ध नहीं है. ऐसे में बिना सटीक आंकड़ों के आरक्षण का आवंटन करना संविधान के सिद्धांतों का उल्लंघन होगा.

जवाब आने के बाद होगी अगली सुनवाई

इस मामले को जस्टिस बी. डी. गुरु ने गंभीरता से लेते हुए याचिका स्वीकार की और राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. इस मामले की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट होगा कि ओबीसी आरक्षण को लेकर पंचायत चुनावों में किस तरह का बदलाव किया जाएगा. यदि अदालत सरकार के तर्कों को अस्वीकार करती है तो आरक्षण निर्धारण प्रक्रिया में संशोधन संभव है. यह फैसला प्रदेश के पंचायत चुनावों के आरक्षण प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है. राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग की ओर से जवाब दाखिल किए जाने के बाद मामले की अगली सुनवाई तय की जाएगी.