Special Story

रायपुर ट्रैफिक पुलिस की सख्त कार्रवाई, 10 दिन में 614 नशेड़ी ड्राइवर पकड़े गए

रायपुर ट्रैफिक पुलिस की सख्त कार्रवाई, 10 दिन में 614 नशेड़ी ड्राइवर पकड़े गए

Shiv Mar 9, 2026 2 min read

रायपुर। राजधानी रायपुर में सड़क हादसों पर लगाम लगाने और नशे…

दुर्ग अफीम खेती मामला: सीएम साय बोले– दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा

दुर्ग अफीम खेती मामला: सीएम साय बोले– दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा

Shiv Mar 9, 2026 2 min read

रायपुर। दुर्ग जिले के समोदा गांव में भाजपा नेता विनायक ताम्रकार…

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से जापान दूतावास के राजनीतिक मामलों के मंत्री आबे नोरिआकि ने की मुलाकात

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से जापान दूतावास के राजनीतिक मामलों के मंत्री आबे नोरिआकि ने की मुलाकात

Shiv Mar 9, 2026 1 min read

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित…

March 9, 2026

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

पूर्व विस अध्यक्ष राजेंद्र शुक्ल की मौत के मामले में अपोलो के फर्जी डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज…

बिलासपुर। अपोलो अस्पताल में 2006 में इलाज के दौरान पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पं. राजेन्द्र शुक्ल की मौत हो गई थी. अब मामले में फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नरेंद्र विक्रमादित्य यादव उर्फ नरेंद्र जान केम के खिलाफ सरकण्डा थाने में धारा 420, 465, 466, 468, 471, 304, 34 के तहत एफआईआर दर्ज किया गया है.

बता दें कि दमोह के मिशन अस्पताल में हार्ट सर्जरी के बाद सात मरीजों की मौत के मामले में खुद को कार्डियोलॉजिस्ट बताने वाले फर्जी डॉक्टर नरेंद्र विक्रमादित्य यादव उर्फ नरेंद्र जॉन केम के खिलाफ मामला दर्ज करते हुए गिरफ्तार किया गया है. कथित डॉक्टर की वजह से अपोलो अस्पताल में भी 7–8 मरीजों की जान गई थी, जिनमें दिग्गज कांग्रेस नेता राजेंद्र प्रसाद शुक्ल भी शामिल थे.

करीब 32 साल तक विधायक छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र शुक्ल का 20 अगस्त 2006 को तबीयत बिगड़ने पर अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था. ऑपरेशन के दौरान उनकी मौत हो गई. उनका ऑपरेशन भी कथित डॉक्टर नरेंद्र ने किया था.

दमोह की घटना सामने आने के बाद राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के परिजनों ने मामले की जांच की मांग की थी. आईएमए के तत्कालीन अध्यक्ष और कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वायएस दुबे ने इसकी जांच करवाई. जांच में पाया गया कि नरेंद्र के दस्तावेज फर्जी थे. उसके पास केवल एमबीबीएस की डिग्री थी, वह कार्डियोलॉजिस्ट नहीं था. वहीं अपोलो हॉस्पिटल प्रबन्धन ने अपने मुख्यालय से डॉक्टर से जुड़े दस्तावेज मंगाए थे. जांच में फर्जी डॉक्टर का नाम, जन्मतिथि और पिता का नाम का अलग-अलग पाया गया था.