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आजादी के 78 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित सवरा जनजाति, सिनोधा के डेरापारा में नारकीय हालात

रायपुर। रायपुर से मात्र 56 किलोमीटर दूर तिल्दा जनपद की सिनोधा ग्राम पंचायत का डेरापारा आज़ादी के 78 वर्ष बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। यहां सवरा जनजाति के लगभग 250 लोग निवास करते हैं, जो दयनीय परिस्थितियों में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। स्वच्छता, स्वास्थ्य, पेयजल, भोजन और आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं का यहां घोर अभाव है।

डेरापारा तिल्दा से करीब 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सवरा जनजाति के लोग परंपरागत रूप से सांप पकड़ने और उनका खेल दिखाकर जीवनयापन करते थे, लेकिन इस पर रोक लगने के बाद उनकी आजीविका छिन गई। डेरा प्रमुख धूकन मरावी के अनुसार, अब लोग रोज़ी-मजदूरी, झाड़ू-पोछा जैसे काम कर किसी तरह गुजर-बसर कर रहे हैं।

यायावर (घुमंतू) जनजाति का टैग लगे होने के कारण अधिकांश लोगों के पास न तो आधार कार्ड है और न ही राशन कार्ड। बच्चों के स्कूल में दाखिले को लेकर भी सरकारी तंत्र उदासीन बना हुआ है। सरकारी योजनाओं का लाभ इनके लिए आज भी एक सपना बना हुआ है। करीब 40-50 लोगों का यह डेरा प्लास्टिक, लकड़ियों और कपड़ों की चिंदियों से बने अस्थायी आश्रयों में रहता है।

पेयजल की भारी समस्या के चलते कई-कई दिनों तक नहाने तक का पानी नसीब नहीं होता, जिससे बच्चों को स्कूल में भेदभाव और झगड़ों का सामना करना पड़ता है। बस्ती में न निजी और न ही कोई सार्वजनिक शौचालय है। भूरी, बुंदिया, बिरंचिन, आलू, सायना और गिरधारी जैसे 5 से 9 वर्ष आयु वर्ग के अनाथ बच्चे इसी डेरे में पल रहे हैं। भोजन और छत की जिम्मेदारी डेरा ही उठाता है, बच्चे कभी कहीं भी खा लेते हैं और कहीं भी सो जाते हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। डेरा प्रमुख के अनुसार, कई महीनों में कभी-कभार कोई नर्स आती है। पांच गर्भवती महिलाओं और 10 धात्री माताओं को अब तक न तो स्वयं और न ही उनके बच्चों को टीकाकरण का लाभ मिला है। कुपोषण साफ दिखाई देता है और पास के आंगनबाड़ी केंद्र से भी डेरापारा को कोई लाभ नहीं मिल पाया है।

सवरा जनजाति की ऐसी ही स्थिति कबीरधाम जिले के बोडला जनपद के बांधाटोला, मुंगेली-लोरमी के ढोलगी गांव, कोरबा जिले के कुरुडीह और बलौदाबाजार जिले के बोरसी गांव में भी देखने को मिलती है, जहां लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।

डेरापारा के लोग सामुदायिक देवगुड़ी और चबूतरे पर विराजमान श्री हनुमान मंदिर को पूर्ण स्वरूप देना चाहते हैं। हाल ही में वनवासी कल्याण आश्रम के संगठन मंत्री एवं छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद के सदस्य रामनाथ कश्यप, परिषद के अन्य सदस्य कृष्णकुमार वैष्णव, सामाजिक कार्यकर्ता सुबोध पांडे और विद्या भारती के अखिल भारतीय अधिकारी सुहास देशपांडे ने डेरापारा पहुंचकर हालात का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को स्वेटर और ग्रामीणों को कंबल आदि वितरित किए।