Special Story

IAS निरंजन दास ने सरकारी खजाने में हेराफेरी की, नहीं दे सकते जमानत : हाईकोर्ट

IAS निरंजन दास ने सरकारी खजाने में हेराफेरी की, नहीं दे सकते जमानत : हाईकोर्ट

Shiv Mar 11, 2026 2 min read

बिलासपुर। प्रदेश के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के…

पर्यटन विभाग के बजट में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 55 प्रतिशत की वृद्धि, तीन नई योजनाओं हेतु कुल 110 करोड़ रूपए का प्रावधान

पर्यटन विभाग के बजट में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 55 प्रतिशत की वृद्धि, तीन नई योजनाओं हेतु कुल 110 करोड़ रूपए का प्रावधान

Shiv Mar 11, 2026 8 min read

रायपुर।  छत्तीसगढ़ विधानसभा में पर्यटन, संस्कृति, पुरातत्व तथा धार्मिक न्यास…

March 11, 2026

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

कस्टम मिलिंग घोटाला मामले में EOW की बड़ी कार्रवाई: आरोपी अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर को किया गिरफ्तार, कोर्ट से पुलिस रिमांड मंजूर

रायपुर। बहुचर्चित कस्टम मिलिंग घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने आज बड़ी कार्रवाई करते हुए सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और व्यवसायी अनवर ढेबर को विशेष अदालत में पेश कर विधिवत गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर जेल से लाकर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।

बता दें कि ईओडब्ल्यू ने इस प्रकरण में अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 11, 13(1)(क), 13(2), भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 384 (जबरन वसूली) एवं 409 (लोकसेवक द्वारा आपराधिक विश्वासभंग) के तहत मामला दर्ज किया है।

पहले से जेल में बंद थे दोनों आरोपी

गौरतलब है कि अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर पहले से शराब घोटाला मामले में जेल में बंद हैं, लेकिन इस कस्टम मिलिंग घोटाले में ईओडब्ल्यू की जांच के बाद इनकी संलिप्तता स्पष्ट होने पर आज विधिवत गिरफ्तारी की गई। जांच में सामने आया है कि दोनों ने मिलकर राज्य में चावल मिलर्स से करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की सुनियोजित साजिश रची और उसे अंजाम तक पहुंचाया।

कोर्ट से पुलिस रिमांड

विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने के बाद दोनों आरोपियों को आगे की पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, अब रिमांड के दौरान उन सभी कड़ियों को जोड़ा जाएगा जिनके माध्यम से इस घोटाले की रकम का प्रवाह हुआ और अन्य संभावित लाभार्थियों की पहचान की जाएगी।

ईओडब्ल्यू की जांच तेज

ईओडब्ल्यू इस पूरे प्रकरण की जांच तेजी से कर रही है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासों की संभावना है। जांच एजेंसी अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।

क्या है पूरा मामला?

यह घोटाला वर्ष 2021–22 के दौरान रचा गया था, जब धान की कस्टम मिलिंग के लिए केंद्र सरकार से 62 लाख मीट्रिक टन की मंजूरी मिली थी। इसके बाद प्रदेश सरकार के भीतर कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों ने मिलर्स से दो किस्तों में अवैध वसूली का तंत्र खड़ा किया।

रिपोर्टों के अनुसार, इस योजना में राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाश रुंगटा, कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर, रामगोपाल अग्रवाल और सिद्धार्थ सिंघानिया जैसे नाम भी शामिल हैं। रोशन चंद्राकर द्वारा अलग-अलग जिलों से वसूली की गई राशि सिद्धार्थ सिंघानिया के माध्यम से अनवर ढेबर और फिर अनिल टुटेजा तक पहुंचाई गई।