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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

कवर्धा। जिले के पिपरिया थाना क्षेत्र के ग्राम बानो में चोरों…

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Shiv Mar 8, 2026 2 min read

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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

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भाजपा नेता के खेत से 8 करोड़ का अफीम जब्त, मक्के के बीच पांच एकड़ से अधिक में उगाई थी फसल

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Shiv Mar 7, 2026 2 min read

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March 8, 2026

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

सामाजिक समरसता के लिए व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर प्रयास होने चाहिए – डॉ. मोहन भागवत 

लखनऊ। निराला नगर स्थित सरस्वती विद्या मन्दिर के माधव सभागार में “कार्यकर्ता कुटुम्ब मिलन” कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि मन्दिर, कुआं और श्मशान सभी हिन्दुओं के लिए एक होने चाहिए और उनमें कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हमें अपने बच्चों को बताना होगा कि करियर क्या है? पेट भरना, ज्यादा कमाना, उपभोग करना, करियर नहीं है। करियर कमाने से ज्यादा बाँटने में है। बच्चों को ऐसी शिक्षा दें जो दान दे, दूसरों के लिए जीना सीखे। घरों में ऐसे संस्कार देने होंगे, जिनसे बच्चे यह समझें कि हमारा हित ही देश के साथ है। मेरे लिए मेरा देश ही पहले है। विद्या और धन अपने देश के लिए कमाना चाहिए।

सरसंघचालक ने कहा कि सामाजिक समरसता के लिए व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर प्रयास होने चाहिए। संघ सारे हिन्दू समाज को एक मानता है। इसलिए हमें व्यक्तिगत स्तर पर और पारिवारिक स्तर पर आपसी मेलजोल बढ़ाना चाहिए। सामाजिक समरसता भाषण से नहीं, करने से आएगी। संघ में जात-पात नहीं है। ऐसा ही समाज में करना होगा। सरसंघचालक जी ने कहा कि संघ पुस्तकें पढ़ने की अपेक्षा स्वयंसेवक को देखने से अधिक समझ में आता है।

समाज की इकाई व्यक्ति नहीं परिवार

उन्होंने कहा कि समाज की इकाई व्यक्ति नहीं परिवार है। सामाजिक व्यवहार का परीक्षण परिवार में होता है। बचत करना हमारे परिवारों की आदत में है। देश का धन हमारे घरों में रहता है। हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चों को मातृभाषा ठीक से आए। हमारे अन्दर देशभक्ति, प्रामाणिकता, अनुशासन और कुटुम्ब गौरव का भाव होना चाहिए।

बस्ती और शाखा में हो कुटुम्ब मिलन

उन्होंने कहा कि 100 से 70 की संख्या में कुटुम्ब मिलन बस्ती और शाखा स्तर पर होना चाहिए। हमें अभाव में नहीं रहना है, लेकिन किसी के प्रभाव में भी नहीं आना है। जैसा संघ है, वैसा ही हमारा जीवन होना चाहिए। पंच परिवर्तन कार्यक्रमों में मातृशक्ति की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है।

हिन्दुस्थान हिन्दू राष्ट्र है, हम सभी हिन्दू सहोदर हैं। समाज में जो भी वर्ग संघ के निकट नहीं है, संघ कार्यकर्ताओं को उनके निकट जाना चाहिए। उनसे आत्मीयतापूर्ण सम्बन्ध विकसित करने चाहिए। वह सम्बन्ध चौराहे से शुरू होकर कुटुम्ब तक विस्तृत हों। सब अपने हैं, हमें यह मानकर व्यवहार करना है।

सरसंघचालक ने कहा कि हम तकनीक को नहीं रोक सकते, लेकिन इसका उपयोग अनुशासन में रहकर हो। कितने समय तक क्या देखना है, यह निर्धारित होना चाहिए। विज्ञान एआई, टीवी, मोबाइल और फिल्मों की हानियाँ भी बताता है। नई पीढ़ी को यह सब बताना चाहिए।

चिरतरुण संगठन है संघ

मोहन भागवत ने कहा कि आज भारतीय ज्ञान परम्परा को सभी जगह माना जाता है। यह विषय हमें अपने बच्चों को बताना चाहिए। तब उन्हें समझ में आएगा कि हम क्या हैं। संघ चिरतरुण संगठन है।