भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाले की छापेमारी में ED ने 40 लाख किये जब्त, ईडी ने 10 जगहों पर छापेमारी का डिटेल किया शेयर
रायपुर। भारतमाला मुआवजा घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर जोनल कार्यालय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। ईडी ने बताया है कि रायपुर–विशाखापट्टनम हाईवे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण में हुए कथित अवैध मुआवजा घोटाले की जांच के सिलसिले में छत्तीसगढ़ के रायपुर और महासमुंद जिलों में दस ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई 29 दिसंबर 2025 को की गई थी।
ईडी की यह कार्रवाई हरमीत सिंह खनूजा एवं अन्य आरोपियों के आवासीय और शासकीय परिसरों पर की गई। यह जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो/आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ACB/EOW), रायपुर द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू की गई है। एफआईआर में अभनपुर, रायपुर के तत्कालीन एसडीओ (राजस्व) निर्भय साहू और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
एफआईआर के अनुसार, आरोप है कि भूमि अधिग्रहण के दौरान सरकारी अधिकारियों से मिलीभगत कर सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर की गई और इसके माध्यम से अवैध रूप से अधिक मुआवजा प्राप्त किया गया। ईडी की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कुछ लोक सेवकों के साथ आपराधिक षड्यंत्र के तहत बड़े भू-खंडों को जानबूझकर परिवार के सदस्यों के नाम पर पीछे की तारीखों (बैकडेटेड एंट्री) में विभाजित दिखाया।
इस कृत्रिम विभाजन का उद्देश्य यह दर्शाना था कि भूमि अधिग्रहण से पहले ही जमीन छोटे-छोटे हिस्सों में बंटी हुई थी। इससे मुआवजा नीति का दुरुपयोग कर कई अलग-अलग भू-स्वामियों के नाम पर अधिक मुआवजा दावा किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि राजस्व अभिलेखों में इस तरह की प्रविष्टियां भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया से पूर्व की दिखाकर स्वीकृत करवाई गईं, जिसके आधार पर अत्यधिक और अवैध मुआवजा राशि का भुगतान कर दिया गया।
ईडी के अनुसार, इस तरह से प्राप्त अतिरिक्त अवैध मुआवजा “अपराध से अर्जित आय” (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) की श्रेणी में आता है। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ, जबकि आरोपियों को अवैध आर्थिक लाभ पहुंचा।
छापेमारी के दौरान ईडी ने ₹40 लाख नकद, कई डिजिटल उपकरण और विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए हैं। इसके अलावा, जांच के दौरान यह भी पाया गया कि आरोपियों ने अपराध से अर्जित आय से कई चल-अचल संपत्तियां खरीदी हैं, जिन्हें उनके या उनसे जुड़े लोगों के नाम पर दर्ज कराया गया है।प्रवर्तन निदेशालय ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है और धन के पूरे लेन-देन की कड़ी, अन्य लाभार्थियों की पहचान तथा कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।






