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किराए के वाहनों पर 130 करोड़ खर्च, पुलिस का कुल वाहन खर्च 350 करोड़ पहुंचा

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Shiv Mar 12, 2026 7 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस ने महज़ साल भर में किराए के वाहनों…

संयुक्त सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों को मिला बड़ा नक्सली डम्प

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Shiv Mar 12, 2026 2 min read

गरियाबंद। जिले के थाना मैनपुर क्षेत्र में सुरक्षा बलों को संयुक्त…

बच्चों से पुताई करवाने वाली प्राचार्या हटाई गई, आरटीई सीटें घटाने पर हाईकोर्ट ने मांगा हलफनामा

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Shiv Mar 12, 2026 2 min read

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में आरटीआई से जुड़ी जनहित याचिका समेत अन्य…

गैस सिलेंडर की किल्लत पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में हंगामा, 35 सदस्य स्वमेव निलंबित

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Shiv Mar 12, 2026 2 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार को शून्यकाल के दौरान महँगाई और…

कोटवार के पद पर खानदानी हक नहीं, योग्यता और चरित्र ही अहम…

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Shiv Mar 12, 2026 2 min read

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोटवारों की नियुक्ति को लेकर कहा है…

March 12, 2026

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जो कहेंगे सच कहेंगे

दुर्ग की ड्रोन दीदी की सफलता के उड़ान की कहानी, बेटी का शौक पूरा करने शुरू किया मशरूम उत्पादन, साल भर में हो गई लाख रूपए की कमाई

रायपुर।   दुर्ग जिले के छोटे से गाँव मतवारी में रहने वाली जागृति साहू की कहानी प्रेरणा से भरी हुई है। पढ़ी-लिखी जागृति ने दो विषयों में पोस्टग्रेजुएट और बी.एड. की डिग्री प्राप्त की है। बचपन से ही जागृति का सपना था कि वह एक शिक्षक बने, लेकिन किस्मत ने कुछ और ही लिखा था। किसी कारणवश वह अपने इस सपने को पूरा नहीं कर पाई, जिससे वह निराश हो गईं।

जागृति के पति चंदन साहू बताते है कि शिक्षक न बन पाने से जागृति के व्यवहार में बहुत परिवर्तन आया। निराशा की वजह से वे ज्यादा बात भी नहीं करती थी। वे कहते हैं ’’मैंने उस वक्त सोचा कि किसी काम में व्यस्त होने से शायद इनका मन लगे। मेरी बेटी और मुझे मशरूम बहुत पसंद था तो मैंने उन्हें मशरूम की खेती करने का सुझाव दिया। बेटी की पसंद की वजह से जागृति ने यह कार्य प्रारंभ किया। देखते ही देखते बेटी की छोटी सी पसंद के लिए शुरू किया गया कार्य जागृति को उंचाईयों तक ले गया। धीरे-धीरे, उन्होंने अपनी रुचि को बढ़ाते हुए हर्बल गुलाल और घरेलू वस्तुएं बनानी शुरू कीं। साल 2019 में, जागृति ने 33 लाख रुपये का मशरूम बेचा, जो उनके मेहनत और समर्पण का परिणाम था। जागृति ने अपने साथ और महिलाओं को भी मुनाफ़ा दिलाया। वे अपने आस पास के गाँव की दीदियों को भी प्रशिक्षण देकर स्वावलंबन की राह दिखाई।’’

जागृति का सफर यहीं नहीं रुका। जागृति ने शासन की योजनाओं का लाभ लिया और एक सामान्य महिला से अपनी अलग पहचान बनाई। मशरूम की खेती से नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करने पर उन्हें “मशरूम लेडी ऑफ़ दुर्ग” कहा जाने लगा। जागृति का सफ़र एक सामान्य महिला से लेकर लखपति दीदी बनने और आज ड्रोन दीदी के रूम में कृषि को उन्नति की ओर ले जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल नमो ड्रोन दीदी में चयनित होकर उन्होंने ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण लिया। आज वह एक प्रमाणित ड्रोन पायलट हैं और ‘ड्रोन दीदी’ के नाम से जानी जाती हैं। ड्रोन के माध्यम से वह खेतों में दवाइयों का छिड़काव करती हैं और इस नई तकनीक का लाभ किसानों तक पहुंचाती हैं। इससे किसानों का समय तो बचता है साथ ही श्रम और खर्च भी कम होता है।

जागृति साहू की कहानी हमें सिखाती है कि किस तरह संघर्ष और मेहनत से किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है और सफलता प्राप्त की जा सकती है। वे बताती हैं की शुरू में लोग उनपर हंसा करते थे और आज उनकी मेहनत और राज्य सरकार तथा केंद्र सरकार की लाभकारी योजनाओं की बदौलत लोग उनका उदाहरण देने लगे हैं।

जागृति शिक्षक तो नही बन पाईं परंतु आज वे कई महिलाओं के लिए व्यवहारिक एवं व्यवसायिक शिक्षक की मिशाल हैं। जागृति कई महिलाओं को ड्रोन, मशरूम उत्पादन एवं घरेलू वस्तुओं के उत्पादन संबंधित तकनीकी एवं व्यवसायिक प्रशिक्षण दे रही हैं। जिससे उनके साथ-साथ अन्य महिलाएं भी स्वावलंबन की ओर अग्रसर हो रही हैं। अपने कौशल व सरकार की योजना के माध्यम से ड्रोन दीदी जागृति ने स्वयं के साथ साथ अन्य महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान किया है।