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छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल विस्तार पर विवाद, कांग्रेस ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, भूपेश बघेल ने बताया, क्यों दी गयी है कोर्ट में चुनौती

रायपुर। छत्तीसगढ़ में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। कांग्रेस ने इस मामले को सीधे बिलासपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी है। पार्टी का आरोप है कि मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या संवैधानिक सीमा से अधिक कर दी गई है, जो नियमों का उल्लंघन है।

कांग्रेस की याचिका

कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने बिलासपुर हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर याचिका दाखिल की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंत्रियों की संख्या का निर्धारण भारत सरकार के बनाए नियमों के आधार पर होना चाहिए। सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि “हमने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। राज्य में मंत्रिमंडल की संख्या अब 14 हो गई है। नियमानुसार मंत्रियों की संख्या विधानसभा सदस्यों की कुल संख्या के 15% से अधिक नहीं हो सकती। अभी तक यह परंपरा रही थी कि मंत्रियों की संख्या 13 से अधिक नहीं होती। हमारी सरकार ने भी केंद्र से इस बाबत अनुमति मांगी थी, लेकिन उस समय मंजूरी नहीं मिली थी। अब बीजेपी सरकार ने नियमों की अनदेखी कर दी है, इसलिए हमें हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा है।”

भूपेश बघेल का बयान

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस मामले पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने ही मंत्रिमंडल की संख्या को 15% तक सीमित करने की व्यवस्था की थी। बघेल ने कहा –
“भारत सरकार ने ही यह व्यवस्था की है कि मंत्रिमंडल का आकार 15% से अधिक नहीं होगा। 90 विधायकों वाली विधानसभा में यह सीमा 13.5 आती है, यानी 13 मंत्री हो सकते हैं। अब 14 मंत्री बनाए गए हैं, जो नियमों का उल्लंघन है। हम संविधान और केंद्र के बनाए प्रावधानों के अनुसार चलना चाहते हैं, इसलिए इस निर्णय को कोर्ट में चुनौती दी गई है।”

टीएस सिंहदेव का मत

पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भी मंत्रिमंडल विस्तार पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह फैसला संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है। उन्होंने आंकड़ों के जरिए समझाया – “आप 14 को 90 से भाग दीजिए तो आंकड़ा 15.55% आता है। संविधान साफ कहता है कि मंत्रिमंडल की संख्या 15% से अधिक नहीं हो सकती। इस लिहाज से 14 मंत्री बनाना गलत है। यह फैसला संविधान की मूल भावना और प्रावधानों के विपरीत है।”

संवैधानिक प्रावधान

संविधान के अनुच्छेद 164(1A) के अनुसार, किसी भी राज्य में मंत्रियों की संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों के 15% से अधिक नहीं हो सकती। छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं। इस हिसाब से मंत्रिमंडल की संख्या अधिकतम 13 तक सीमित रहनी चाहिए।