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March 9, 2026

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सदन में भिड़ गये देवेंद्र यादव और अजय चंद्राकर, असंसदीय भाषा पर विधानसभा अध्यक्ष ने लगायी फटकार

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को प्रश्नकाल के बीच सदन का माहौल अचानक गरमा गया। कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव और भाजपा विधायक अजय चंद्राकर के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो धीरे-धीरे तू-तू मैं-मैं और नारेबाजी तक पहुंच गई। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से सदन का अनुशासनिक वातावरण बिगड़ता देख विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा।

मामला उस समय शुरू हुआ जब भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने जल एवं स्वच्छता मिशन को लेकर उप मुख्यमंत्री अरुण साव से सवाल पूछा। जवाब के बीच में कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव अपनी सीट से खड़े हो गए और एक दस्तावेज लहराते हुए जोरदार आवाज में बोले कि “यह विधानसभा का ही दस्तावेज है, जिसमें साफ लिखा है कि जब तक कार्य पूर्ण नहीं होता, तब तक 70 प्रतिशत से अधिक राशि का भुगतान नहीं किया जा सकता।”

यादव की तीखी भाषा और उच्च स्वर पर आपत्ति जताते हुए अजय चंद्राकर अपनी सीट से खड़े हो गए और सवाल किया कि “ये किस नियम के तहत इतनी ऊंची आवाज में बोल रहे हैं?” इसके बाद दोनों नेताओं के बीच शब्दों की तलवार चलने लगी और मामला असंसदीय भाषा तक पहुंच गया। देवेंद्र यादव अपनी सीट से आगे भी बढ़ने लगे, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।

हालात को बिगड़ता देख विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने तत्काल हस्तक्षेप किया और दोनों नेताओं को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा,

“प्रश्नकाल जनता देखती है, देश देखता है। इस तरह की भाषा और आचरण छत्तीसगढ़ विधानसभा की गरिमा के खिलाफ है।”

उन्होंने विशेष रूप से देवेंद्र यादव को नसीहत देते हुए कहा कि वे दो बार के विधायक हैं और उन्हें संसदीय परंपराओं की समझ होनी चाहिए। बाद में दोनों पक्षों द्वारा प्रयोग किए गए असंसदीय शब्दों को सदन की कार्यवाही से विलोपित कर दिया गया। डॉ. रमन सिंह ने सदन को स्मरण दिलाया कि

“यह विधानसभा रजत जयंती मना रही है और पूरे देश में इसकी मर्यादा और परंपरा की मिसाल दी जाती है। हमें इसे कायम रखना है, नई मिसालें नहीं बनानी हैं।”

प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस-भाजपा विधायकों के बीच तीखी बहस के बीच देवेंद्र यादव और अजय चंद्राकर के बीच असंसदीय भाषा का प्रयोग किया। विधानसभा अध्यक्ष का कड़ा हस्तक्षेप और फटकार, असंसदीय शब्द कार्यवाही से हटाए गए। सदन की गरिमा बनाए रखने की नसीहत दी गयी।