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महापुरुषों के जीवन और विचारों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ेगी नई पीढ़ी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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12 हजार क्विंटल चावल की हेराफेरी पर डिप्टी सीएम अरुण साव का बड़ा बयान, कहा- किसी को बख्शा नहीं जाएगा, कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे भ्रष्टाचार…

मुंगेली। जिले में सामने आया करीब साढ़े 5 करोड़ रुपए का 12 हजार क्विंटल चावल घोटाला इन दिनों सुर्खियों में है. प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव का इस मामले में सरकार के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि अगर घोटाला हुआ है, तो किसी को बख्शा नहीं जाएगा. हमारी सरकार भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी.

लोरमी प्रवास के दौरान डिप्टी सीएम अरुण साव ने मुंगेली में मीडिया के चावल घोटाले को लेकर किए गए सवाल पर यह बयान दिया है. यह बयान कितनी दूर तक कार्रवाई में बदलता है. क्या दोषियों पर FIR होगी? क्या दुकानों के लाइसेंस रद्द होंगे? क्या जिलों में व्यापक जांच शुरू होगी? इस पूरे वाकये से एक बार फिर से सिस्टम की साख दांव पर है.

बता दें कि जनवरी 2025 में राज्य शासन के निर्देश पर हुए भौतिक सत्यापन में मुंगेली जिले की 80 पीडीएस दुकानों में 12,000 क्विंटल चावल का अंतर सामने आया था. यह अंतर कोई अनुमान नहीं, बल्कि भौतिक जांच में प्रमाणित गड़बड़ी थी. इसके बावजूद दोषी संचालकों के नाम अब तक सार्वजनिक नहीं किए गए.

घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज इस घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है, जबकि भौतिक स्थिति पर शॉर्टेज बरकरार है. हद तो ये है कि रिकवरी की कार्रवाई एक इंच भी आगे नहीं बढ़ती दिखाई दे रही है. दुकानों का संचालन अब भी उन्हीं हाथों में है, जहां गड़बड़ी पाई गई थी.

छह महीने, सैकड़ों फाइलें… लेकिन कार्रवाई ‘ज़ीरो’!

जिन 80 दुकानों में गड़बड़ी पाई गई थी, उन्हें नोटिस जारी किए गए थे, और कुछ मामलों को एसडीएम कोर्ट तक भेजा गया था. लेकिन न कोई जब्ती, न निलंबन, न प्राथमिकी — ऐसा लग रहा है जैसे विभागीय सांठगांठ से इस तरह का खेल चल रहा हो? अब डिप्टी सीएम की कड़ी टिप्पणी के बाद यह उम्मीद जरूर जगी है कि शासन इस मामले को गंभीरता से लेगा.

‘नान घोटाला-2’ बनने की राह पर

जानकारों का मानना है कि अगर यह घोटाला सिर्फ मुंगेली में 12 हजार क्विंटल चावल तक सीमित नहीं रहा, तो यह राज्यव्यापी खाद्यान्न घोटाले का रूप ले सकता है, क्योकि 12 हजार क्विंटल याने करीब साढ़े 5 करोड़ रुपये का चावल शॉर्टेज एक जिले का मामला है. जानकार मानते हैं कि प्रदेश के लगभग सभी जिलों में यही स्थिति है. भौतिक सत्यापन के आंकड़ों पर ही एक नजर घुमाया जाये तो सब कुछ क्लियर हो जाएगा.

सबसे बड़ा सवाल: नाम क्यों छिपाए जा रहे

जिस शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की बात होती है, वहां मुंगेली जिले में जब 80 दुकानों की गड़बड़ी साबित हो चुकी है तो इन संचालकों के नाम सामने क्यों नहीं लाए जा रहे? यहाँ तक मीडिया को भी यह जानकारी साझा करने में विभाग के अफ़सरों को परहेज है. क्या चावल घोटालेबाजों को राजनीतिक या विभागीय संरक्षण मिला हुआ है? जनता को जानकारी से दूर रखकर आखिर किसे बचाया जा रहा है?