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प्राचार्य पदोन्नति पर फैसला सुरक्षित: हाईकोर्ट में सुनवाई पूर्ण, जल्द आ सकता है ऐतिहासिक निर्णय

बिलासपुर।    प्राचार्य पदोन्नति को लेकर बहुप्रतीक्षित कानूनी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर में 11 जून से लगातार चल रही सुनवाई आज 17 जून को समाप्त हो गई, जिसमें सभी पक्षों को सुनने के बाद डबल बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

यह सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति रजनी दुबे एवं  अमितेंद्र कुमार प्रसाद की खंडपीठ में हुई। शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता यशवंत सिंह ठाकुर ने पक्ष रखा, जबकि प्राचार्य पदोन्नति फोरम की ओर से दायर हस्तक्षेप याचिकाओं में अधिवक्ता अनूप मजूमदार, आलोक बख्शी, अमृतोदास, एन. नहा राय और विनोद कुमार देशमुख ने प्रभावी रूप से पैरवी की।

प्राचार्य पदोन्नति फोरम के संयोजक अनिल शुक्ला ने आशा व्यक्त की है कि सुनवाई के दौरान रखी गई मजबूत दलीलों और तथ्यों के आधार पर फैसला फोरम के पक्ष में आने की पूरी संभावना है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि 16 जून से नया शिक्षा सत्र प्रारंभ हो चुका है, इसलिए उम्मीद है कि न्यायालय जल्द निर्णय देगा और पदोन्नति की राह खुलेगी।

आज की सुनवाई के दौरान प्राचार्य पदोन्नति फोरम की ओर से आकाश राय, एस.के. चिंचालकर, विकास नायक और मनोज कुमार सनाढ्य उपस्थित रहे।

अब सबकी नजरें फैसले पर टिकी हैं, जो प्रदेश के सैकड़ों शिक्षकों के भविष्य को नई दिशा दे सकता है। यह मामला केवल एक कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में प्रशासनिक पदों की न्यायसंगत बहाली की दिशा में एक अहम कदम है।