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फांसी की सजा उम्रकैद में बदली: गैंगरेप और ट्रिपल मर्डर केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

बिलासपुर। गैंगरेप और ट्रिपल मर्डर केस में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अदालत से मिली चार आरोपियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। मामला कोरबा के बहुचर्चित वारदात से जुड़ा है। मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने कहा कि सजा देने में कानून के सभी पहलुओं, घटनाक्रम और आरोपियों की उम्र को ध्यान में रखना जरूरी है। ऐसे में आजीवन कारावास ही न्याय का उद्देश्य पूरा करने के लिए काफी है।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा

हाईकोर्ट ने इस केस में एक अन्य आरोपी उमाशंकर यादव की उम्रकैद की सजा को भी बरकरार रखा है और उसकी बरी करने की अपील खारिज कर दी है। । हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक यह मामला भले ही समाज को झकझोरने वाला है, लेकिन यह ‘दुर्लभतम से दुर्लभ’ की श्रेणी में नहीं आता, जिसमें फांसी की सजा दी जाए।  आपको बता दें कि घटना जनवरी 2021 में कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा इलाके में हुई थी।

2021 में हुई थी वारदात

एक आदिवासी समुदाय की 16 साल की एक लड़की के साथ गैंगरेप की घटना हुई थी। फिर उसकी, उसके पिता और 4 साल की नातिन की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया था। संतराम मंझवार (45), अनिल सारथी (20), आनंद दास (26), परदेशी दास (35), जब्बार उर्फ विक्की (21) और उमाशंकर यादव (22)। आरोपी संतराम, किशन (बदला हुआ नाम) से मवेशी चरवाता था।

बदला लेने के लिए दिया था वारदात को अंजाम

बताया गया कि दोनों के बीच सालाना मजदूरी और अनाज देने का समझौता हुआ था, लेकिन जब पीड़ित ने बकाया मांगा तो टालमटोल किया गया। इसके बाद किशन अपनी पत्नी, बेटी और नातिन के साथ हिसाब लेने गया था। कुछ पैसे और चावल देने के बाद संतराम और उसके साथियों ने तीनों की बाइक से छोड़ने की बात कहकर रोक लिया, और फिर रास्ते में सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिया।

पिता के सामने ही बेटी से गंदा काम

घटना के अगले दिन 30 जनवरी 2021 को कोराई जंगल में तीनों के शव बरामद हुए। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पहले किशन को शराब पिलाई, फिर उसके सामने ही उसकी बेटी से गैंगरेप किया। जब उसने विरोध किया तो उसे लाठी-डंडों से पीट-पीटकर मार डाला।

इसके बाद लड़की और उसकी 4 साल की नातिन को भी बेरहमी से मार दिया गया। पॉक्सो कोर्ट की विशेष न्यायाधीश डॉ. ममता भोजवानी ने चार आरोपियों को फांसी और उमाशंकर यादव को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने इसे अमानवीय, वीभत्स और समाज को झकझोरने वाली घटना बताया था। लेकिन अब उस फैसले को कोर्ट ने बदल दिया है।