Special Story

पुराना महापौर बंगला बनेगा ED का दफ्तर, नगर निगम की MIC बैठक में मंजूरी

पुराना महापौर बंगला बनेगा ED का दफ्तर, नगर निगम की MIC बैठक में मंजूरी

Shiv Mar 18, 2026 2 min read

रायपुर। राजधानी रायपुर में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) का पता बदलने…

मुख्यमंत्री से मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने की मुलाकात

मुख्यमंत्री से मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने की मुलाकात

Shiv Mar 18, 2026 1 min read

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित…

रींवा-रायपुर हवाई सेवा से बढ़ी नजदीकियां मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल का छत्तीसगढ़ दौरा

रींवा-रायपुर हवाई सेवा से बढ़ी नजदीकियां मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल का छत्तीसगढ़ दौरा

Shiv Mar 18, 2026 2 min read

रायपुर। मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य तथा चिकित्सा…

March 18, 2026

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

राजीव गांधी शिक्षा मिशन में करोड़ का कंप्यूटर खरीदी घोटाला, तीन आरोपियों के खिलाफ EOW ने कोर्ट में पेश किया चालान

रायपुर। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB) रायपुर ने राजीव गांधी शिक्षा मिशन में वर्ष 2010-11 और 2011-12 के दौरान कंप्यूटर उपकरणों की खरीदी में हुए करोड़ों के घोटाले मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए विशेष न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया है। ब्यूरो में इस मामले में अपराध क्रमांक 38/16 के तहत धारा 420, 467, 468, 471 और 120 (बी) भादवि के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। विस्तृत जांच के बाद सोमवार 16 मार्च को विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) रायपुर के समक्ष आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया गया।

जांच में सामने आया कि राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत कंप्यूटर समर्थित योजना में राज्य के उस समय के 18 जिलों की शासकीय उच्च प्राथमिक शालाओं को एलएफडी/टीएफटी कंप्यूटर युक्त उपकरण उपलब्ध कराए जाने थे। इसके लिए दो चरणों में कुल 638 एलएफडी/टीएफटी मॉनिटर की मांग की गई थी। इनमें वर्ष 2010-11 में 246 और वर्ष 2011-12 में 392 मॉनिटर शामिल थे।

मामले में मिनी इंफोटेक रायपुर के संचालक आलोक कुशवाहा ने वर्ष 2010-11 में 246 मॉनिटर की आपूर्ति की, जबकि ग्लोबल नेटवर्क सॉल्यूशन रायपुर द्वारा वर्ष 2011-12 में 392 मॉनिटर सप्लाई किए गए। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपियों ने आपराधिक षड़यंत्र के तहत एचपी और एग्माटेल कंपनियों के फर्जी और कूटरचित ऑथराइजेशन लेटर तैयार कर शासन को गुमराह किया।

मॉनिटर की कीमतों में भारी गड़बड़ी

सबसे बड़ा खुलासा मॉनिटर की कीमतों में भारी गड़बड़ी को लेकर हुआ। जिन मॉनिटरों का बाजार मूल्य लगभग 57,950 रुपये प्रति नग था, उन्हें शासन को 1,26,500 रुपए प्रति नग की दर से सप्लाई किया गया। इस तरह फर्जी दस्तावेजों और मिलीभगत के जरिए शासन को कुल 4,72,88,462 रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई। विवेचना के बाद ईओडब्ल्यू/एसीबी ने आरोपी आलोक कुशवाहा, अंजू कुशवाहा और संजीत साहा के खिलाफ विशेष न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया है। वहीं मामले से जुड़े शासकीय अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को अनुशंसा भी भेजी गई है।