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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सौगात: अरपा नदी में बैराज निर्माण से मिल रही स्थानीय जनों को राहत

रायपुर।  अरपा नदी छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले की जीवनरेखा है जो अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है. समय के साथ आरप नदी के जल की मात्रा में कमी आई और इसके पुनर्जीवन की आवश्यकता महसूस की गई. इस विषय में राज्य सरकार ने अरपा नदी के पुनर्जीवन के लिए कई परियोजनाएं शुरू की हैं, जिनमें शिवघाट और पचरीघाट में बैराज निर्माण प्रमुख हैं.छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने इसके लिए 60 करोड़ 64 लाख 40 हजार रूपए स्वीकृत किए है. जल संसाधन विभाग मंत्रालय महानदी भवन से बैराज निर्माण कार्य को पूर्ण कराने मुख्य अभियंता हसदेव कछार जल संसाधन विभाग बिलासपुर को प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है.

परियोजना का उद्देश्य और लाभ

अरपा नदी में वर्षभर जल प्रवाह सुनिश्चित करने और भू-जल स्तर में सुधार लाना जनहित में बहुत ही ज़रूरी है यही वजह है कि राज्य के मुख्यमंत्री ने इस को गति देने का निरनय लिया है. इन बैराजों के निर्माण से नदी में जलभराव क्षमता बढ़ेगी, जिससे आसपास के क्षेत्रों में कृषि और पेयजल आपूर्ति में सुधार होगा. इन बैराजों के निर्माण से अरपा नदी में कोनी से देवरीखुर्द तक लगभग 11 किमी तक वर्ष भर जलभराव सुनिश्चित होगा. यह न केवल जल संरक्षण में सहायक होगा, बल्कि बिलासपुर शहर के गिरते भू-जल स्तर को नियंत्रित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. इसके अलावा, बैराज के ऊपर निर्मित सड़कें स्थानीय यातायात को सुगम बनाएंगी और नदी के किनारे सौंदर्यीकरण कार्य शहर को एक नई पहचान भी देगा. इससे स्थानीय समुदाय के जीवन गुणवत्ता में भी सकारात्मक परिवर्तन आएगा.

जल संरक्षण: बैराज के माध्यम से नदी में वर्षभर जल का संरक्षण सुनिश्चित करना, जिससे नदी का प्रवाह बना रहे. नदी में स्थायी जल उपलब्धता से आसपास के क्षेत्रों में भू-जल स्तर में सुधार होगा, जिससे कुओं और नलकूपों में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी. नदी में जल प्रवाह से पर्यावरणीय संतुलन स्थापित होगा, जिससे जैव विविधता को संरक्षण मिलेगा. नदी के दोनों किनारों पर सौंदर्यीकरण और सड़कों के निर्माण से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होगा.

बैराज निर्माण से होने वाले अन्य लाभ

बैराज निर्माण से नदी में जल की स्थायी उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल मिलेगा. इससे फसलों की उत्पादकता में वृद्धि होगी और कृषि पर निर्भर लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा. नदी में जल संरक्षण से आसपास के क्षेत्रों में भू-जल स्तर में वृद्धि होगी. यह पेयजल की उपलब्धता को सुनिश्चित करेगा और जल संकट की समस्याओं का समाधान करेगा. नदी में निरंतर जल प्रवाह से मछलियों और अन्य जलीय जीवों का संरक्षण होगा. साथ ही, नदी के किनारों पर हरित पट्टी के विकास से पर्यावरणीय संतुलन स्थापित होगा. बैराज निर्माण और नदी के सौंदर्यीकरण से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. नदी के किनारों पर पार्क, वॉकवे और अन्य सुविधाओं के विकास से स्थानीय और बाहरी पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकेगा.पर्यटन और कृषि में सुधार से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा.

छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार और स्थानीय प्रशासन इस परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. बैराज निर्माण के साथ-साथ नदी के दोनों किनारों पर सड़कों का निर्माण और सौंदर्यीकरण कार्य भी प्रगति पर है. आने वाले वर्षों में, यह परियोजना बिलासपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

शिवघाट बैराज की विशेषताएं

शिवघाट बैराज की लंबाई: 334 मीटर है और उसमें लगने वाले 12 मीटर x 3.50 मीटर के गेट्स की संख्या 24 है. इसकी जलभराव क्षमता 1.80 मिलियन घन मीटर है.बैराज के ऊपर से होकर जाने वाली सड़क की चौड़ाई 7.50 मीटर है. अनुमान है इस बैराज के निर्माण से बिलासपर के कोनी तक लगभग 3 किमी तक वर्षभर जलभराव रहेगा, जिससे स्थानीय पर्यावरण और भू-जल स्तर में सुधार होगा. शिवघाट बैराज परियोजना की प्रगति में राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही.

छत्तीसगढ़ राज्य की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों में अरपा नदी का विशेष स्थान है. यह नदी बिलासपुर शहर के मध्य से बहती है और स्थानीय जनजीवन, कृषि तथा पर्यावरण पर इसका गहरा प्रभाव है. हाल के वर्षों में, अरपा नदी में जल स्तर में कमी और प्रदूषण जैसी समस्याओं के कारण इसकी महत्ता में कमी आई है. इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर अरपा नदी पर शिवघाट और पचरीघाट के पास बैराज निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया है.

अरपा नदी पर शिवघाट और पचरीघाट में बैराज निर्माण परियोजना छत्तीसगढ़ राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है. यह न केवल जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को स्थापित करेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, कृषि और पर्यटन को भी बढ़ावा देगा. छत्तीसगढ़ की साय सरकार की यह पहल राज्य के सतत विकास और जनकल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित होगा.