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तहसीलदार और नायब तहसीलदारों का हुआ तबादला, देखें लिस्ट…

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Shiv Mar 9, 2026 2 min read

बिलासपुर। जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से…

निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुनी गईं लक्ष्मी वर्मा और फूलोदेवी नेताम, विधानसभा पहुंचकर लिया प्रमाण पत्र, समर्थकों ने दी बधाई

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Shiv Mar 9, 2026 2 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ से भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस प्रत्याशी फूलोदेवी…

अस्पताल परिसर में लगी भीषण आग, आधा दर्जन कंडम एंबुलेंस समेत अन्य वाहन जलकर खाक

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Shiv Mar 9, 2026 1 min read

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में…

बिलासपुर में अवैध हुक्का बार पर पुलिस की दबिश, होटल मैनेजर गिरफ्तार

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Shiv Mar 9, 2026 2 min read

बिलासपुर। जिले में अवैध रूप से संचालित हुक्का बार पर…

March 9, 2026

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मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्री चामुण्डा धाम में की पूजा अर्चना

उज्जैन।      मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन की बड़नगर  तहसील के ग्राम गजनीखेड़ी स्थित श्री चामुण्डा धाम मन्दिर में पूजा अर्चना कर देश और प्रदेश की खुशहाली की कामना की। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य  एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रहलाद जोशी, सांसद अनिल फिरोजिया और विधायक जितेन्द्र पंडयाने भी पूजा की। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष, सरपंच,  पुजारी ईश्वरगिरी गोस्वामी सहित जन-प्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

पुजारी ईश्वरगिरी गोस्वामी ने बताया कि गजनीखेड़ी में यहां चंड-मुंड का संहार करने वाली मां चामुंडा का ऐतिहासिक भव्य मंदिर है। वर्तमान में यह मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन है। माना जाता है कि यहां माता की प्रतिमा दिन में तीन रूप धारण करती है। यह छठी या सातवीं शताब्दी का गुप्तकालीन मंदिर है, गर्भ गृह की प्रमुख मूर्ति चामुंडा माता की है। बाजू में स्कंद माता और प्रति स्कंद माता की मूर्ति है। दूसरी तरफ दुर्लभ शेषशायी गणेशजी की मूर्ति है। प्रसिद्ध पुरातत्वविद वी.एस. वाकणकर के अनुसार यह अत्यंत दुर्लभ मूर्ति है। इस प्रकार की दूसरी मूर्ति काठमांडू (नेपाल) में है। मंडप के दाहिनी ओर बाह्य भित्ति पर 11वीं सदी की पांच पंक्ति का नागरी लिपि में एक लेख उत्कीर्ण है। मंदिर के आंगन में दो छतरियां एवं एक कुंड स्थित है। यह स्थान निमाड़ सहित इंदौर क्षेत्र के अरझरे और लाड़ परिवार की कुलदेवी का स्थान माना जाता है।शारदीय नवरात्र में हजारों यात्री निमाड़ क्षेत्र से यहां आते है और तीन दिन तक रुककर पूजन-अर्चन करते हैं।