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छत्तीसगढ़ NGO घोटाला: CBI ने तेज की जांच, पूर्व मंत्री और 7 IAS अधिकारी जांच के दायरे में

रायपुर। छत्तीसगढ़ के समाज कल्याण विभाग से जुड़ा NGO घोटाला अब गंभीर रूप ले चुका है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की टीम ने मंगलवार को मना स्थित समाज कल्याण विभाग के दफ्तर में पहुंचकर कई अहम दस्तावेजों की जांच की। CBI अधिकारियों ने डिप्टी डायरेक्टर से स्टेट रिसोर्स सेंटर (SRC) से संबंधित फाइलें मांगीं और NGO से जुड़े तीन बंडल दस्तावेजों की फोटोकॉपी लेकर जांच के लिए सुरक्षित किया।

CBI ने कहा है कि दस्तावेजों की गहन जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि इस मामले में एक तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री और सात IAS अधिकारियों सहित कुल 14 लोगों के नाम सामने आए हैं।

कैसे बना NGO और कौन थे इसके फाउंडर:

साल 2004 में तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री रेणुका सिंह, रिटायर्ड IAS विवेक ढांढ, एम.के. राउत, डॉ. आलोक शुक्ला, सुनील कुजूर, बी.एल. अग्रवाल, सतीश पांडे और पी.पी. श्रोती ने मिलकर दो NGO बनाए थे। इन संस्थाओं में राज्य प्रशासनिक सेवा (RAS) के छह अधिकारियों को भी शामिल किया गया था।

NGO का उद्देश्य दिव्यांगजनों की मदद के लिए योजनाएं चलाना बताया गया था — जैसे सुनने की मशीनें, व्हीलचेयर, ट्राईसाइकिल, कैलिपर और कृत्रिम अंग का वितरण। लेकिन जांच में पाया गया कि ये सारी गतिविधियां केवल कागजों पर दर्ज थीं। ज़मीन पर कोई वास्तविक काम नहीं हुआ।

बिना मान्यता और पारदर्शिता के चलता रहा NGO:

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह NGO समाज कल्याण विभाग से मान्यता प्राप्त भी नहीं था, फिर भी केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से करोड़ों रुपये इसके खातों में ट्रांसफर होते रहे। यह सिलसिला लगभग 14 वर्षों तक चलता रहा।

नियमों के मुताबिक कोई भी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी किसी NGO में सदस्य नहीं हो सकता, लेकिन इस मामले में मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने मिलकर यह संस्था बनाई और कानून का खुला उल्लंघन किया।

इसके अलावा, NGO के गठन के 45 दिन के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य होता है, लेकिन इस संस्था में 17 वर्षों तक कोई चुनाव नहीं हुआ। प्रबंधकारिणी की कोई बैठक नहीं बुलाई गई और न ही किसी वर्ष का ऑडिट रिपोर्ट तैयार किया गया।

CBI की अगली कार्रवाई:

CBI फिलहाल सभी दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि किस अवधि में, किन खातों में और किन परियोजनाओं के नाम पर राशि जारी की गई। सूत्रों के मुताबिक, CBI आने वाले दिनों में संबंधित अधिकारियों और NGO पदाधिकारियों से पूछताछ भी कर सकती है।यह घोटाला न केवल वित्तीय अनियमितताओं का मामला है, बल्कि यह प्रशासनिक स्तर पर हुए सत्ताधारी गठजोड़ और भ्रष्टाचार की एक गहरी परत भी उजागर करता है।