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भाजपा नेता के खेत से 8 करोड़ का अफीम जब्त, मक्के के बीच पांच एकड़ से अधिक में उगाई थी फसल

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विद्युत विभाग की कार्रवाई: 81 कनेक्शन काटे, बकायादारों में हड़कंप

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छत्तीसगढ़ की महिलाएं आत्मनिर्भरता और नवाचार से बना रही हैं नई पहचान – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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Shiv Mar 7, 2026 5 min read

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March 8, 2026

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लंबित प्रकरणों में आई ऐतिहासिक कमी, मुख्य न्यायधीश रमेश सिन्हा के नेतृत्व में न्यायिक दक्षता को मिली नई दिशा

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (बिलासपुर हाईकोर्ट) की ओर से न्यायिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, संवेदनशील एवं समयबद्ध बनाने की दिशा में किए जा रहे सतत एवं समन्वित प्रयासों के परिणाम स्वरूप वर्ष 2025 में लंबित प्रकरणों की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। यह उपलब्धि त्वरित, पारदर्शी एवं सुलभ न्याय के प्रति उच्च न्यायालय की दृढ़ प्रतिबद्धता को प्रतिध्वनित करती है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की प्रेरणा, दूरदर्शी नेतृत्व एवं निरंतर मार्गदर्शन में उच्च न्यायालय ने “न्याय में देरी, न्याय से वंचना की भावना को आत्मसात करते हुए प्रकरणों के शीघ्र एवं प्रभावी निराकरण पर विशेष बल दिया है। उनके कुशल नेतृत्व में न्यायिक दक्षता, उत्तरदायित्व एवं संस्थागत उत्कृष्टता को सुदृढ करने के लिए ठोस नीतिगत दिशा-निर्देश, सतत निगरानी एवं न्याय वितरण प्रणाली से जुड़े सभी हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित किया गया।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एक जनवरी 2025 को उच्च न्यायालय में कुल 84,305 प्रकरण लंबित थे। वर्ष 2025 के दौरान 55,416 नवीन प्रकरण संस्थित हुए, जबकि इसी अवधि में 64,054 प्रकरणों का निराकरण किया गया। परिणाम स्वरूप वर्ष के अंत तक लंबित प्रकरणों की संख्या में 8,638 की कमी दर्ज की गई, जो लगभग 10.25 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट को दर्शाती है। विशेष रूप से यह तथ्य उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में निराकरण दर संस्थापन की तुलना में 115.59 प्रतिशत रही, जिससे यह स्पष्ट होता है कि नए प्रकरणों की अपेक्षा अधिक पुराने प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया।

यह महत्वपूर्ण उपलब्धि मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की प्रेरणादायी सोच, न्यायाधीशों की अटूट प्रतिबद्धता, न्यायिक अधिकारियों एवं न्यायालयीन स्टाफ के समर्पित एवं समन्वित प्रयासों का नतीजा है। इन सामूहिक प्रयासों से न केवल न्यायिक प्रणाली की दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, बल्कि आम नागरिकों को शीघ्र एवं प्रभावी न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में भी यह एक सशक्त और सार्थक कदम सिद्ध हुआ है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय भविष्य में भी लंबित प्रकरणों में निरंतर कमी लाने न्यायिक सुधारों को और अधिक सुदृढ करने तथा जनता द्वारा उस पर प्रदत्त विश्वा अक्षुण्ण बनाए रखने के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है।