Special Story

रायपुर ट्रैफिक पुलिस की सख्त कार्रवाई, 10 दिन में 614 नशेड़ी ड्राइवर पकड़े गए

रायपुर ट्रैफिक पुलिस की सख्त कार्रवाई, 10 दिन में 614 नशेड़ी ड्राइवर पकड़े गए

Shiv Mar 9, 2026 2 min read

रायपुर। राजधानी रायपुर में सड़क हादसों पर लगाम लगाने और नशे…

दुर्ग अफीम खेती मामला: सीएम साय बोले– दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा

दुर्ग अफीम खेती मामला: सीएम साय बोले– दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा

Shiv Mar 9, 2026 2 min read

रायपुर। दुर्ग जिले के समोदा गांव में भाजपा नेता विनायक ताम्रकार…

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से जापान दूतावास के राजनीतिक मामलों के मंत्री आबे नोरिआकि ने की मुलाकात

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से जापान दूतावास के राजनीतिक मामलों के मंत्री आबे नोरिआकि ने की मुलाकात

Shiv Mar 9, 2026 1 min read

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित…

March 9, 2026

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सीधी भर्ती राजस्व निरीक्षकों के लिए अलग वरिष्ठता सूची विचार/जारी करने के निर्देश दिए

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर ने शुक्रवार को एक महत्त्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए राज्य सरकार को यह निर्देश दिया कि प्रत्यक्ष भर्ती और पदोन्नति से आए राजस्व निरीक्षकों की अलग-अलग वरिष्ठता सूची तैयार किए जाने संबंधी मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया जाए। यह मामला न्यायमूर्ति ए.के. प्रसाद की एकलपीठ के समक्ष आया, जिसमें याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने विस्तृत बहस की।

हितेश कुमार वर्मा एवं 35 अन्य का कहना था कि वे 2016 के विज्ञापन के आधार पर प्रतियोगी परीक्षा और दस्तावेज़ सत्यापन प्रक्रिया के बाद 5 जनवरी 2019 को राजस्व निरीक्षक के पद पर नियुक्त हुए। उनके अनुसार, छत्तीसगढ़ भू-अभिलेख वर्ग-III अशासी (कार्यपालिका एवं तकनीकी) सेवा भर्ती नियम, 2014 में यह व्यवस्था है कि केवल 25 प्रतिशत पद प्रत्यक्ष भर्ती से और 75 प्रतिशत पद पदोन्नति से भरे जाते हैं, जिनमें से 70 प्रतिशत पटवारियों और 5 प्रतिशत ट्रेसरों के लिए आरक्षित हैं। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि प्रत्यक्ष भर्ती वाले उम्मीदवारों के लिए स्नातक की योग्यता अनिवार्य है, जबकि पदोन्नत पटवारी केवल 12वीं उत्तीर्ण होते हैं।

याचिकाकर्ताओं की सबसे बड़ी आपत्ति इस बात पर थी कि दोनों धाराओं को एक ही वरिष्ठता सूची में रखा जाता है, जिससे कम शैक्षणिक योग्यता वाले पदोन्नत पटवारी प्रत्यक्ष भर्ती स्नातक निरीक्षकों से ऊपर आ जाते हैं। इसका सीधा परिणाम यह होता है कि पदोन्नति के अवसर, जैसे कि सहायक अधीक्षक भू-अभिलेख (ASLR) और नायब तहसीलदार जैसे उच्च पद, पदोन्नत पटवारियों को मिल जाते हैं, जबकि प्रत्यक्ष भर्ती स्नातक निरीक्षक पीछे रह जाते हैं।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष यह भी रखा कि दिनांक 1 जून 2023 को जारी एक आदेश में केवल पदोन्नत निरीक्षकों को ही ASLR के पद पर पदोन्नति के लिए विचार किया गया, जबकि प्रत्यक्ष भर्ती स्नातक निरीक्षकों को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया गया। उन्होंने इसे स्पष्ट और शत्रुतापूर्ण भेदभाव करार दिया और यह दलील दी कि यह स्थिति संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में प्रदत्त समान अवसर के सिद्धांत का उल्लंघन करती है।

बहस के दौरान याचिकाकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी एक महत्त्वपूर्ण उदाहरण भी प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग में पहले से ही यह व्यवस्था लागू है कि स्नातक ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों और गैर-स्नातक अधिकारियों की अलग-अलग वरिष्ठता सूचियाँ बनाई जाती हैं। इस मिसाल को सामने रखते हुए उन्होंने कहा कि जब कृषि विभाग इस प्रकार की व्यवस्था कर सकता है तो राजस्व विभाग में भी प्रत्यक्ष भर्ती और पदोन्नति से आए निरीक्षकों के लिए अलग-अलग वरिष्ठता सूचियाँ बनाना पूरी तरह संभव और न्यायोचित है।

राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार को इस मुद्दे पर कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि सक्षम प्राधिकारी नियमों और सेवा विनियमों के अनुसार याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन पर विचार करेंगे और उचित निर्णय देंगे।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस चरण पर वह याचिका के गुण-दोष में नहीं जा रही है। बल्कि, न्यायहित में यह उचित होगा कि याचिकाकर्ताओं को यह स्वतंत्रता दी जाए कि वे चार सप्ताह की अवधि में सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपना विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत करें। अदालत ने यह भी स्पष्ट निर्देश दिया कि यदि ऐसा अभ्यावेदन प्रस्तुत किया जाता है तो राज्य सरकार उसे गंभीरता से विचार में ले और तीन माह की अवधि के भीतर कारणयुक्त एवं स्पष्ट (reasoned and speaking) आदेश पारित करे।

महत्त्वपूर्ण रूप से, न्यायमूर्ति ए.के. प्रसाद ने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि राज्य सरकार निर्णय लेते समय इस तथ्य पर विशेष ध्यान दे कि प्रत्यक्ष भर्ती और पदोन्नत निरीक्षक वास्तव में दो अलग-अलग धाराएँ (distinct streams) हैं। इसलिए उनकी वरिष्ठता सूची भी अलग-अलग बनाई जानी चाहिए ताकि शिक्षा, योग्यता और भर्ती की पद्धति के अनुसार न्याय सुनिश्चित हो सके। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि कृषि विभाग ने पहले ही इस समस्या का समाधान दो अलग-अलग वरिष्ठता सूचियाँ बनाकर किया है और राजस्व विभाग में भी इस मॉडल को अपनाया जा सकता है।