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March 9, 2026

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छत्तीसगढ़ सरकार का कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला, अब संगठनों को तीन साल तक शासन से पत्राचार की मिलेगी अधिमान्यता, राजपत्र में हुआ प्रकाशन

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने शासकीय कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य के शासकीय कर्मचारी संगठन अपने निर्धारित कार्यकाल के अनुसार सरकारी मान्यता प्राप्त कर सकेंगे। इस फैसले के तहत सरकार ने “छत्तीसगढ़ शासकीय सेवक (सेवा संघ) नियम, 2025” को अधिसूचित कर दिया है, जिससे लंबे समय से कर्मचारियों की लंबित मांग पूरी हो गई है।

यह अधिसूचना सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी की गई है, जिसे छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित किया गया है। राज्य सरकार ने इसे भारत के संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लागू किया है। अधिसूचना के अनुसार, कोई भी कर्मचारी संगठन तभी मान्यता प्राप्त होगा जब वह संबंधित शासकीय सेवकों के वर्ग का कम से कम 20% प्रतिनिधित्व करता हो।

राज्य सरकार उक्त प्रतिनिधित्व की पुष्टि के लिए संगठन से दस्तावेज मांग सकती है और उसकी जांच कर सकती है। यदि सभी शर्तें पूर्ण पाई जाती हैं, तो ऐसे संगठन को तीन वर्ष अथवा उसके वर्तमान कार्यकाल (जो भी पहले हो) तक के लिए पत्राचार की अस्थायी मान्यता प्रदान की जाएगी।

फेडरेशन ने जताया आभार

छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के प्रदेश संयोजक कमल वर्मा ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव के प्रति इस कर्मचारी हितैषी निर्णय के लिए आभार व्यक्त किया है।

प्रदेश संयोजक कमल वर्मा, प्रदेश प्रवक्ता जी.आर. चंद्रा और चंद्रशेखर तिवारी ने बताया कि फेडरेशन विगत 6 वर्षों से पंजीयक, फर्म्स एवं सोसायटी द्वारा निर्धारित कार्यकाल के अनुसार कर्मचारी संगठनों को मान्यता देने की मांग कर रहा था। इस मुद्दे को लेकर फेडरेशन ने आंदोलन भी किया था।

बता दें कि कर्मचारी संगठनों के पंजीयन के दौरान पंजीयक, फर्म्स एवं सोसायटी द्वारा कार्यकाल निर्धारित किया जाता है। पूर्व में शासन द्वारा वर्ष 2015 में जारी निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक वर्ष दिसंबर तक चार बिंदुओं में जानकारी देने पर ही संगठन को मान्यता प्रदान की जाती थी। इस प्रक्रिया में अत्यधिक समय लगने के कारण कई बार संगठनों को केवल 3 से 4 माह की मान्यता ही प्राप्त हो पाती थी। जटिल प्रक्रिया के कारण कई संगठनों को वर्षों से मान्यता नहीं मिल पाई थी।

कमल वर्मा ने आगे बताया कि वर्तमान सरकार के गठन के बाद, फेडरेशन ने निहारिका समिति के समक्ष भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। समिति ने इसे गंभीरता से लेते हुए प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चंपावत एवं उप सचिव शैलभ साहू ने फेडरेशन से सतत् संपर्क में रहते हुए इस ऐतिहासिक निर्णय को अंतिम रूप तक पहुंचाया। फेडरेशन ने अधिकारियों के प्रति भी विशेष आभार व्यक्त किया है।