छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी का 11 सूत्रीय मांगों को लेकर 29–31 दिसंबर तक प्रदेशभर में कलम बंद–काम बंद आंदोलन
रायपुर। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय आह्वान पर प्रदेशभर के कर्मचारी और अधिकारी 29 से 31 दिसंबर तक सामूहिक अवकाश लेकर जिला स्तरीय कलम बंद–काम बंद आंदोलन में शामिल होंगे। यह आंदोलन प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा के नेतृत्व में सभी जिला मुख्यालयों में आयोजित किया जाएगा।
फेडरेशन के प्रांतीय सह प्रवक्ता ललित कुमार बिजौरा ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों से किए गए वादों, विशेषकर “मोदी की गारंटी”, को लागू नहीं किए जाने से कर्मचारी-अधिकारी वर्ग में भारी नाराजगी है। शासन की वादाखिलाफी और लंबित मांगों की अनदेखी के विरोध में यह आंदोलन किया जा रहा है।

ललित कुमार बिजौरा ने बताया कि आंदोलन के माध्यम से कर्मचारियों की 11 सूत्रीय प्रमुख मांगों को लेकर दबाव बनाया जाएगा। इनमें केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता लागू करना, डीए एरियर्स की राशि जीपीएफ खाते में समायोजित करना, चार स्तरीय समयमान वेतनमान प्रदान करना, प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा की गणना करते हुए संपूर्ण सेवा लाभ देना शामिल है। इसके अलावा लिपिक, शिक्षक, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग सहित विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियों को दूर करने, पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने, सहायक शिक्षकों एवं सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को तृतीय समयमान वेतनमान देने की मांग भी प्रमुख है।
अन्य मांगों में नगरीय निकाय कर्मचारियों को नियमित मासिक वेतन एवं समयबद्ध पदोन्नति, अनुकंपा नियुक्ति नियमों में 10 प्रतिशत सीलिंग में शिथिलीकरण, कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने, अर्जित अवकाश नकदीकरण 300 दिवस करने, दैनिक, अनियमित और संविदा कर्मचारियों को नियमित करने तथा सभी विभागों में समानता लाते हुए सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने की मांग शामिल है।
प्रांतीय सह प्रवक्ता ने बताया कि इन मांगों में शिक्षक एलबी संवर्ग की प्रमुख मांग—प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवाकाल की गणना कर संपूर्ण सेवा लाभ देने और वेतन विसंगति दूर करने—को विशेष रूप से शामिल किया गया है। उन्होंने शिक्षक एलबी संवर्ग सहित सभी विभागों के कर्मचारी-अधिकारियों से तीन दिवसीय कलम बंद–काम बंद आंदोलन में सामूहिक अवकाश लेकर शामिल होने की अपील की है।






