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छत्तीसगढ़ विधानसभा : नेता प्रतिपक्ष ने उठाया पीएम आवास ग्रामीण में गड़बड़ी का मुद्दा, CBI जांच की मांग की

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रश्नकाल में बुधवार को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में भ्रष्टाचार और लेनदेन के आरोपों को लेकर जोरदार बहस हुई। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने आरोप लगाया कि कई जिलों में आवास स्वीकृति के बदले लाभार्थियों से पैसे लिए जा रहे हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की CBI जांच की मांग कर डाली।

डॉ. महंत ने कहा कि आवास मित्रो और ग्रामीणों से शिकायतें मिली हैं कि बैगा परिवारों समेत अन्य हितग्राहियों से पैसों की वसूली की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि तखतपुर, कोटा, महेंद्रगढ़ और जशपुर जैसे इलाकों में कई मकानों को अधूरा होने के बावजूद पूर्ण दिखा दिया गया है, और कई जगह मृत लोगों के नाम पर भी भुगतान हो चुका है।

डिप्टी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा ने जवाब में कहा कि राज्य सरकार सुशासन और पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार में सुशासन है और सुदर्शन भी है, किसी भी गड़बड़ी को बख्शा नहीं जाएगा। कुकदूर (कबीरधाम) क्षेत्र की शिकायत पर जांच चल रही है, तखतपुर की जानकारी आप अभी दे रहे हैं, उस पर भी कार्रवाई होगी।”

डॉ. महंत ने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री स्वयं कह चुके हैं कि जहां-जहां गड़बड़ी मिलेगी, वहां कलेक्टरों पर कार्रवाई होगी, तो अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए? उन्होंने कहा कि “सुशासन तिहार” के दौरान भी दर्जनों शिकायतें सामने आई थीं लेकिन अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई।

मनरेगा भुगतान पर भी उठा सवाल

महंत ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर मनरेगा के अंतर्गत मजदूरी भुगतान नहीं हुआ है, जबकि सरकार का दावा है कि 30 जून तक सभी भुगतान पूरे हो चुके हैं। इस पर विजय शर्मा ने जवाब देते हुए कहा कि “लेबर पेमेंट का काम समय पर हो गया है, अगर कहीं गड़बड़ी है तो जानकारी दें, कार्रवाई होगी।”

एआई डाटा को लेकर भी बहस

महंत ने कहा कि मंत्री बार-बार AI के आंकड़ों को खारिज कर रहे हैं, जबकि रिपोर्टें वास्तविक स्थिति को दर्शा रही हैं। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि “AI की रिपोर्टें हमेशा 100% विश्वसनीय नहीं होतीं।”

सदन में हुआ हंगामा

विजय शर्मा के इस बयान पर कि “जिनकी सरकार ने पहले आवास योजना को ठुकराया, वे अब सवाल खड़े कर रहे हैं”, विपक्ष भड़क उठा और सदन में हंगामा हो गया। तीखी नोकझोंक के बीच डॉ. महंत ने दो टूक कहा कि राज्य सरकार या EOW इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती, इसलिए CBI जांच की जरूरत है।