छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र: शून्यकाल में गूंजा पोर्टा केबिन में छात्राओं के गर्भवती का मुद्दा, स्थगन प्रस्ताव अग्राह्य होने पर विपक्ष ने किया कार्यवाही का बहिष्कार…
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में सोमवार को शून्यकाल के दौरान बीजापुर जिला के गंगालूर में संचालित पोर्टा केबिन में छात्राओं के गर्भवती होने के मामले में विपक्ष स्थगन लाया. सत्तापक्ष के जवाब से और स्थगन की सूचना के अस्वीकृत होने पर विपक्ष ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया.
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गंगालूर पोर्टा केबिन का मामला उठाते हुए कहा कि लगातार नाबालिक छात्राओं, खासतौर के आदिवासी लड़कियों, के साथ 2002 से लगातार यह घटनाएं घट रही है. इस पर सरकार दोषियों पर कोई कार्यवाही नहीं कर रही है. इस पर हम स्थगन लाए हैं. कृपया सारा काम रोककर इसमें चर्चा कराएं.
विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि बीजापुर मामले पर लाए, इसमें एक बच्ची 11वीं में पढ़ती थी, और दूसरी बच्ची 12वीं में, लेकिन अब तक सरकार ने कोई कार्यवाही नहीं की है. इस पर चर्चा जरूरी है. कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने कहा कि हमें जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार दोनों बच्चियों को छात्रावास से भगा दिया गया है. प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इस पर लीपापोती की जा रही है.
विधायक संगीता ने कहा कि 2024 में मैं खुद जांच समिति में गई थी. में पोर्टा केबिन में भी गई थी. गंभीर मामला है. लखमा ने चर्चा में कहा कि बस्तर के पोर्टा केबिन की यह घटना दर्दनाक है. सरकार से निवेदन है कि अधिकारी पर कार्यवाही की जाए. क्या आदिवासी दुश्मन है? क्या आदिवासी बच्चे पढ़ेंगे नहीं क्या? मां-बाप बच्चों को पढ़ने-लिखने के लिए भेजते हैं, पर वह कोई नहीं है. दोषियों पर कार्यवाही होनी जरूरी है.
विधायक अनिला भेड़िया ने कहा कि हमारे बस्तर मामले का मामला है. अधीक्षिका की जब ऐसी बाते सामने आती है, तब उन्हें घर भेज दिया जाता है. एफआईआर कराने के बजाए उन्हें संरक्षण देने की कोशिश की जाती है. क्या आदिवासी बच्चियों को इसलिए हम पढ़ने भेजते है? यह गंभीर विषय है कार्यवाही रोककर चर्चा कराए.
विधायक देवेंद्र यादव ने कहा कि पूरा देश आज के समय में ऐप्सिटन फाइल को देखकर तकलीफ में है. प्रासंगिक रूप से बच्चियों के साथ गलत कृत्य को छुपाया जाना शर्मनाक हुआ इसमें चर्चा करना आवश्यक है.
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने कहा कि पोर्टा केबिन में घटनाएं अभी की नहीं है, सालों से चली आ रही हैं. अभी तो रेप का मामला आया है. बच्चियों की अचानक मौत हो जाती है, बाद में बीमारी को उनको मौत की वजह बताई जाती है. ना डॉक्टर, ना रहने की व्यवस्था. आप इस पर पूरी तरह से विचार कर ले और इस पर चर्चा कराए.
इस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि विपक्ष का आरोप निराधार है, किसी आरोपी को नहीं बचाया जा रहा है. तीनों बच्चियां वर्तमान में पोटा केबिन में नहीं पढ़ती. तीनों बच्चियों और परिजनों ने जवाब दिया है कि स्वयं से वह आना – जाना करते हैं. ऐसी कोई दुर्घटना में सरकार लीपापोती नहीं करती है. ऐसी कोई घटना होती है. तो सरकार कार्रवाई करती है.
विपक्ष के आरोपों को लेकर शिक्षा मंत्री ने कहा कि पोर्टा कैबिन कलेक्टर के देख-रेख में चलती है. प्रशासन की हमेशा नजर बनी रहती है. वहीं सदन में चर्चा की मांग पर उन्होंने कहा कि बड़ी दुर्घटना घटी है, मामला संदिग्ध है. स्थानीय कलेक्टर के निर्देश पर जांच चल रही है. जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई करेंगे. इसके साथ ही आसंदी ने स्थगन की सूचना को अग्राह्य करने पर विपक्ष ने बहिर्गमन किया.





