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March 9, 2026

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शराब घोटाले में चेतन्य बघेल को मिले थे 16.70 करोड़, ईडी ने पूर्व सीएम के बेटे की गिरफ्तारी को लेकर जारी किया बयान

रायपुर।  छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को 18 जुलाई 2025 को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है। ईडी ने उन्हें विशेष न्यायालय (PMLA), रायपुर में पेश किया, जहां से उन्हें 22 जुलाई 2025 तक ईडी की रिमांड पर भेज दिया गया है। चेतन्य बघेल की गिरफ्तारी को लेकर ईडी ने एक अधिकारिक प्रेस  विज्ञप्ति जारी की है।

प्रेस को जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि ईडी की यह जांच ACB/EOW रायपुर द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई थी, जिसमें आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस और ईडी की जांच में यह सामने आया है कि 2019 से 2022 के बीच हुए इस शराब घोटाले से राज्य सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हुआ और करीब 2500 करोड़ रुपये की अवैध आय (Proceeds of Crime – POC) अर्जित की गई।

चैतन्य बघेल के खिलाफ आरोप क्या हैं?

ईडी के अनुसार, चैतन्य बघेल ने 16.70 करोड़ रुपये की अवैध कमाई को अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में खपाया। उन्होंने यह पैसा नकद में ठेकेदारों को भुगतान, फर्जी बैंक एंट्री और फ्लैट खरीद के बहाने से उपयोग किया। वह त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ मिलकर एक ‘विठ्ठलपुरम’ नामक परियोजना में फर्जी फ्लैट खरीद की योजना बनाकर 5 करोड़ रुपये प्राप्त करने के आरोप में भी घिरे हैं। इन फ्लैटों को ढिल्लन के कर्मचारियों के नाम पर खरीदा गया था, लेकिन असल लाभार्थी चैतन्य ही थे।

जांच में यह भी पाया गया कि चैतन्य ने इस घोटाले से जुड़े 1000 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध धनराशि को हैंडल किया और इसे अनवर ढेबर एवं अन्य के माध्यम से छत्तीसगढ़ कांग्रेस के तत्कालीन कोषाध्यक्ष तक पहुंचाया गया। यह राशि बघेल परिवार के करीबी लोगों द्वारा आगे निवेश के लिए प्रयोग की गई।

अब तक कौन-कौन फंसे हैं?

इस मामले में अब तक ईडी द्वारा जिन प्रमुख लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें शामिल हैं:अनिल टुटेजा (पूर्व आईएएस),अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लन,अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी कवासी लखमा (तत्कालीन आबकारी मंत्री और वर्तमान विधायक)ईडी ने बताया कि यह घोटाला सिर्फ शराब बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे अर्जित धन का उपयोग राजनीतिक और निजी निवेशों में किया गया है। मामले में धन की अंतिम उपयोगिता की जांच अभी चल रही है और आने वाले समय में और भी खुलासे संभव हैं।