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शराब घोटाले की चार्जशीट में कैबिनेट का जिक्र, आरोपों पर बिफरी कांग्रेस ने कहा, “यह सब षडयंत्र है कांग्रेस को बदनाम करने का”

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने मंगलवार को रायपुर की विशेष अदालत में 6वां चालान पेश किया। इस चालान में कांग्रेस सरकार के समय कैबिनेट स्तर पर लिए गए फैसलों का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि 2020-21 में उच्च स्तर के राजनीतिक दबाव और षडयंत्र के तहत नई आबकारी नीति को कैबिनेट से मंजूरी दिलाई गई, जिससे राज्य सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।

कैबिनेट मंजूरी और नई आबकारी नीति पर सवाल

चार्जशीट के अनुसार, 2020-21 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने नई आबकारी नीति को मंजूरी दी थी। EOW का दावा है कि इस नीति के जरिए एक सुनियोजित षडयंत्र रचा गया, जिससे शराब वितरण और सप्लाई व्यवस्था में निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। EOW ने कोर्ट को बताया कि इस निर्णय के पीछे तत्कालीन अधिकारियों और नेताओं का राजनीतिक दबाव था।

FL-10 लाइसेंस और घोटाले का पैटर्न

EOW ने जांच में पाया कि शराब सप्लाई के लिए FL-10 लाइसेंस जारी किए गए थे। यह लाइसेंस विदेशी शराब की खरीद, भंडारण और परिवहन के लिए दिया जाता है।

FL-10 A: किसी भी राज्य से इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) खरीदकर बेचने की अनुमति।

FL-10 B: राज्य के निर्माताओं से विदेशी ब्रांड की शराब लेकर विभाग को बेचने की अनुमति।

हालांकि, जिन कंपनियों को ये लाइसेंस मिले थे, उन्होंने भंडारण और परिवहन की जिम्मेदारी पूरी नहीं की, बल्कि यह काम सीधे बेवरेज कॉर्पोरेशन को सौंप दिया गया। EOW के मुताबिक इस व्यवस्था के कारण राज्य को लगभग 248 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

सिंडिकेट का खुलासा

चार्जशीट में बताया गया कि तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी, निरंजन दास, अनवर ढेबर, विकास अग्रवाल और अरविंद सिंह ने मिलकर एक सिंडिकेट बनाया। इस सिंडिकेट ने शासकीय शराब दुकानों में सप्लाई पर कमीशन, डिस्टलरी से अतिरिक्त शराब निर्माण और विदेशी शराब सप्लाई पर अवैध वसूली की व्यवस्था की थी।

लाभार्थियों की पहचान
EOW की जांच के अनुसार,

ओम साई बेवरेज प्रा.लि. से जुड़े विजय कुमार भाटिया को 14 करोड़ रुपए मिले। उन्होंने अलग-अलग अकाउंट और डमी डायरेक्टरों के जरिए यह रकम निकाली।

नेक्सजेन पावर इंजिटेक प्रा.लि. से जुड़े संजय मिश्रा, मनीष मिश्रा और अभिषेक सिंह को 11 करोड़ रुपए मिले।

तीसरी कंपनी दिशिता वेंचर्स प्रा.लि. को भी लाइसेंस देकर फायदा पहुंचाया गया।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

मामले पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि यह सब कुछ कांग्रेस को बदनाम करने की साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि EOW एकतरफा कार्रवाई कर रही है और बीजेपी नेताओं पर जांच नहीं हो रही। बैज ने सवाल उठाया कि “अगर कांग्रेस गलत है तो जांच कीजिए, लेकिन बीजेपी के 3% कमीशन, जग खरीदी, ट्रैक सूट और जेम पोर्टल की भी जांच होनी चाहिए। चूहा-बिल्ली का खेल नहीं चलेगा।”