बिलासपुर में बिल्डर का बड़ा खेल! 60 फ्लैट की अनुमति, 90 फ्लैट का नक्शा पास; EWS जमीन भी निकली फर्जी
बिलासपुर। न्यायधानी के अज्ञया नगर क्षेत्र में एक बिल्डर प्रोजेक्ट को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने नगर निगम और नगर तथा ग्राम निवेश विभाग (T&CP) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि ‘मेसर्स अनंत रियाल्टी’ प्रोजेक्ट में बिल्डर नमन गोयल ने कथित रूप से अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों को दरकिनार कर शासन को गुमराह किया है।


मामले का सबसे बड़ा विवाद एरिया स्टेटमेंट और स्वीकृत नक्शे में भारी अंतर को लेकर है। जानकारी के अनुसार, अनुमोदित एरिया स्टेटमेंट में बिल्डर ने चार मंजिलों में केवल 60 फ्लैट बनाने का उल्लेख किया था, जबकि विभाग ने उसी प्रोजेक्ट के नक्शे में 6 मंजिलों के साथ 90 फ्लैट दर्शाते हुए उसे मंजूरी दे दी। दोनों दस्तावेजों के बीच यह स्पष्ट विसंगति होने के बावजूद स्वीकृति मिलना कई सवाल खड़े करता है।
बताया जा रहा है कि प्रोजेक्ट का नक्शा ‘विकास सिंह’ नामक इंजीनियर के माध्यम से तैयार कराया गया है। जबकि बिलासपुर में इस नाम का कोई पंजीकृत आर्किटेक्ट या इंजीनियर उपलब्ध नहीं है। आरोप है कि इस नाम का उपयोग पहले भी कथित तौर पर फर्जी नक्शे पास कराने में किया गया था, जिसके चलते नगर निगम द्वारा इस पहचान से जुड़े लाइसेंस को निलंबित भी किया जा चुका है। इसके बावजूद उसी नाम से नया बड़ा प्रोजेक्ट पास होना विभागीय मिलीभगत की ओर संकेत करता है।
इसके अलावा नियमों के अनुसार बड़े प्रोजेक्ट में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए फ्लैट आरक्षित करना अनिवार्य होता है। बिल्डर ने शपथ पत्र देकर दावा किया कि ग्राम तिफरा के खसरा नंबर 407/7 पर EWS फ्लैट बनाए जाएंगे। लेकिन जांच में सामने आया कि संबंधित जमीन बिल्डर के नाम पर दर्ज ही नहीं है।
इस पूरे मामले को लेकर अब बिल्डर और संबंधित अधिकारियों पर शासन से धोखाधड़ी के आरोप लग रहे हैं। मांग की जा रही है कि मामले की जांच कर बिल्डर नमन गोयल और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और प्रोजेक्ट की विकास व भवन अनुज्ञा तत्काल निरस्त की जाए, ताकि आम लोगों के साथ संभावित धोखाधड़ी रोकी जा सके। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।






