Special Story

कोल लेवी प्रकरण में नई चार्जशीट, शेल फर्मों से 40 करोड़ की लेयरिंग का खुलासा

कोल लेवी प्रकरण में नई चार्जशीट, शेल फर्मों से 40 करोड़ की लेयरिंग का खुलासा

Shiv Mar 10, 2026 3 min read

रायपुर। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो, रायपुर द्वारा…

साय कैबिनेट का बड़ा निर्णय, धर्मांतरण रोकने के लिए नया विधेयक मंजूर

साय कैबिनेट का बड़ा निर्णय, धर्मांतरण रोकने के लिए नया विधेयक मंजूर

Shiv Mar 10, 2026 3 min read

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज विधानसभा स्थित…

केंद्रीय बलों के खर्च पर सदन में बहस, गृहमंत्री ने वापसी की टाइमलाइन बताई

केंद्रीय बलों के खर्च पर सदन में बहस, गृहमंत्री ने वापसी की टाइमलाइन बताई

Shiv Mar 10, 2026 2 min read

रायपुर। विधानसभा में मंगलवार को गृह और पंचायत मंत्री विजय शर्मा…

March 10, 2026

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

बड़ी खबर: कंपलसरी रिटायर किए गए पूर्व IPS जीपी सिंह की बहाली का रास्ता साफ, कैट के फैसले पर लगी दिल्ली हाईकोर्ट की मुहर

नई दिल्ली। कंपलसरी रिटायरमेंट किए गए पूर्व आईपीएस जीपी सिंह को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत मिली है. केंद्र सरकार की ओर से कैट के आदेश को चुनौती दिए जाने वाली याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है. जीपी सिंह ने कंपलसरी रिटायरमेंट को कैट में चुनौती दी थी. कैट ने उनके पक्ष में फ़ैसला सुनाते हुए उन्हें बहाल करने का आदेश दिया था. कैट के आदेश के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी राज्य में उनके विरुद्ध चल रहे प्रकरण में उनके पक्ष में फ़ैसला सुनाया था.

कैट के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट की ओर सही ठहराये जाने के बाद अब छत्तीसगढ़ पुलिस में उनकी बहाली का रास्ता साफ हो गया है. जीपी सिंह 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत और गिरीश कठपालिया की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की है. दिल्ली हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल 2024 को कैट के आदेश को सही ठहराया है. इससे पहले जीपी सिंह को छत्तीसगढ़ सरकार की अनुशंसा पर भारत सरकार ने कंपलसरी रिटायर कर दिया था. इस फैसले के खिलाफ जीपी सिंह कैट की शरण ली थी.

जल्द हो सकती है सेवा बहाली

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब अनुमान लगाया जा रहा है कि जीपी सिंह जल्द सेवा में लौट आयेंगे. राज्य सरकार केंद्र को एक बार फिर सिफारिश भेज सकती है. इससे पहले भी कैट के फ़ैसले के बाद राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को सिफारिश भेजी थी लेकिन तब केंद्र ने पुनर्विचार की चिट्ठी भेज दी थी.