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Shiv Mar 12, 2026 2 min read

रायपुर। प्रदेश में अफीम की खेती पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल…

छत्तीसगढ़ के IPS अमित कुमार केंद्र में ADG के लिए इम्पैनल्ड

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Shiv Mar 12, 2026 1 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ कैडर के 1998 बैच के प्रतिष्ठित IPS अधिकारी…

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Shiv Mar 12, 2026 4 min read

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Shiv Mar 12, 2026 2 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल ने कक्षा 10वीं (हाईस्कूल) और 12वीं…

भाजपा नेता की अफीम खेती पर बवाल, कांग्रेस का भाजपा कार्यालय पर प्रदर्शन

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Shiv Mar 12, 2026 2 min read

बिलासपुर। प्रदेश में दुर्ग के बाद बलरामपुर में अफीम की…

नक्सलवाद खत्म करने के दावे पर कांग्रेस के सवाल, 17 मार्च को विधानसभा घेराव का ऐलान

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Shiv Mar 12, 2026 3 min read

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर नक्सलवाद, कानून…

March 12, 2026

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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : पति की मौत के बाद तलाकशुदा पत्नी पेंशन, अनुकंपा नियुक्ति की हकदार नहीं

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला देते हुए कहा है कि, तलाकशुदा पत्नी मृत पति की पारिवारिक पेंशन व अनुकंपा नियुक्ति की हकदार नहीं हो सकती। दरअसल कानूनी रूप से अलग हुई पत्नी ने पति की आकस्मिक मौत के बाद लाभ पाने यह याचिका पेश की थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि तलाक की डिक्री से पति- पत्नी के मध्य कानूनी बंधन भंग होने से मृतक के पारिवारिक पेंशन का लाभ पाने का हक समाप्त हो जाता है। कोर्ट ने कहा है कि वसीयतनामा जरूर अलग से मृतक की संपत्ति का निपटान का अधिकार देती है।

रायपुर निवासी याचिकाकर्ता महिला की वर्ष 2005 में चर्च में शादी हुई थी। उसने पारिवारिक विवाद पर परिवार न्यायालय में पति से तलाक लेने आवेदन दिया। जून 2008 में न्यायालय ने पत्नी के पक्ष में तलाक का डिक्री पारित कर पति को प्रति माह दो हजार रुपए मेंटेनेंस व्यय देने का आदेश दिया। पति-पत्नी स्थाई रूप से अलग रह रहे थे। दिसंबर 2012 में तलाकशुदा पति की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। पति की मौत के तुरंत बाद तलाकशुदा पत्नी ने पारिवारिक पेंशन व अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन कर दिया। विभाग ने उसके तलाकशुदा होने व मृतक द्वारा सेवा पुस्तिका में भाई को नामिनी किए जाने पर महिला के आवेदन को खारिज कर दिया। इसके खिलाफ उसने याचिका पेश की थी। मामला पेचीदा होने पर कोर्ट ने न्याय मित्र की सहायता ली। 10 वर्ष की लंबी सुनवाई व सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न न्यायदृष्टांत को देखते हुए कोर्ट ने महिला की याचिका को खारिज कर दिया है।

तलाक के बाद अधिकार और दायित्व समाप्त

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि, एलआईसी पेंशन विनियमन, 1995 का नियम 2 (के) भी परिवार को परिभाषित करता है। इसमें न्यायिक रूप से अलग हुई पत्नी या पति भी शामिल है। कोर्ट ने कहा है कि न्यायिक अलगाव और तलाक यह कानून की स्थापित स्थिति है। तलाक की डिक्री पति और पत्नी के बीच के कानूनी बंधन को निर्णायक रूप से भंग कर देती है। पत्नी को उनके वैवाहिक कर्तव्यों और दायित्वों से मुक्ति करता है। तलाक के मामले में अलग होने से पत्नी की स्थिति में बदलाव आने के साथ ही विवाह और सभी पारस्परिक अधिकार और दायित्व समाप्त हो जाते हैं। हालांकि वे दोबारा शादी करने के लिए स्वतंत्र होते हैं।