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भोरमदेव शक्कर कारखाना प्रबंधन की किसानों से अपील, कहा- ‘दंड देना नहीं, सहकारिता को बचाना है मकसद’

कवर्धा। सहकारिता को मजबूती देने और किसानों के सुरक्षित भविष्य को लेकर भोरमदेव सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना मर्यादित, कवर्धा ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. कारखाना प्रबंधन ने अपने सदस्य गन्ना किसानों के नाम एक अपील जारी की है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि यह कोई चेतावनी नहीं बल्कि कारखाने और किसान- दोनों के अस्तित्व को बचाने का एक साझा अवसर है.

गन्ना आपूर्ति में कमी से बढ़ी चिंता

प्रबंधन द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, पिछले तीन पेराई सत्रों (2023-24, 2024-25 और वर्तमान 2025-26) में सर्वे अनुमान के मुकाबले पर्याप्त गन्ना कारखाने को नहीं मिल पाया है. गन्ने की कम आपूर्ति के कारण कारखाने की पेराई क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा है, जिसका सीधा असर उत्पादन और आर्थिक स्थिरता पर पड़ रहा है.

क्या कहते हैं सहकारी नियम?

प्रबंधन ने सहकारी उपविधियों का हवाला देते हुए बताया कि उपविधि धारा 07(02)(घ) के तहत सदस्य किसानों के लिए अपने गन्ने की आपूर्ति कारखाने में करना अनिवार्य है. धारा 09(क)(05) के अनुसार, यदि कोई किसान सर्वे के अनुरूप लगातार गन्ना आपूर्ति नहीं करता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त करने का प्रावधान है. कारखाना प्रबंधन ने जोर देकर कहा है कि इन नियमों का उद्देश्य किसी किसान को दंडित करना नहीं है, बल्कि संस्था की निरंतरता और किसानों के दीर्घकालिक हितों की रक्षा करना है.

गन्ना आपूर्ति बढ़ने से किसानों को होंगे ये फायदे

प्रबंधन ने बताया कि यदि किसान सर्वे के अनुसार गन्ना देते हैं, तो कारखाना सुचारू रूप से चलेगा और इसका सीधा लाभ किसानों को ही मिलेगा. पेराई अवधि बढ़ने और उत्पादन में वृद्धि होने से भुगतान की प्रक्रिया तेज और सुरक्षित होगी. किसानों को मिलने वाली रियायती शक्कर, प्रेस मड, उन्नत बीज और आधुनिक खेती का प्रशिक्षण निरंतर मिलता रहेगा. कारखाने के मजबूती से चलने से स्थानीय ग्रामीण रोजगार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा.

साझा जिम्मेदारी की अपील

अंत में, कारखाना प्रबंधन ने सभी सदस्य किसानों से आग्रह किया है कि वे इस साझा जिम्मेदारी को समझें. सर्वे के अनुरूप गन्ना आपूर्ति कर भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने को किसानों की उन्नति का मजबूत आधार बनाए रखने में सहयोग करें.