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भिलाई स्टील प्लांट पर वादाखिलाफी का आरोप, नारायणपुर में ट्रक मालिकों का चक्काजाम, घंटों थमा आवागमन…

नारायणपुर। जिले में आज खनन गतिविधियों और प्रशासनिक प्रतिबंधों के खिलाफ ट्रक मालिकों एवं जनप्रतिनिधियों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया. भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए ट्रक यूनियन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने चक्काजाम कर जोरदार प्रदर्शन किया. इस अचानक प्रदर्शन से नारायणपुर – अंतागढ़ मुख्य मार्ग पर घंटों आवागमन बाधित रहा और यात्री बसें व अन्य वाहन जाम में फंसे रहे.

दरअसल, नारायणपुर जिले के खोड़गांव–अंजरेल क्षेत्र में बीएसपी की लौह अयस्क खदान संचालित है. खदान से निकाले गए लौह अयस्क को ट्रकों के माध्यम से नारायणपुर से अंतागढ़ तक ले जाया जाता है, जिसकी दूरी लगभग 50 किलोमीटर है. ट्रक मालिकों का कहना है कि मार्ग सिंगल लेन होने के कारण प्रशासन ने इस रास्ते पर माइंस से जुड़ी भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है.

प्रतिबंध के चलते ट्रकों को कोंडागांव होकर लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है, जिससे दूरी बढ़कर लगभग 250 किलोमीटर हो जाती है. इससे डीजल, समय और श्रम—तीनों का खर्च कई गुना बढ़ गया है.

प्रदर्शन कर रहे ट्रक संचालकों ने बताया कि नारायणपुर शहर से दिन के समय ट्रकों के गुजरने पर प्रतिबंध है और केवल रात में ही आवाजाही की अनुमति दी गई है. ऐसे में ड्राइवरों को दिनभर इंतजार करना पड़ता है और रात में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. वहीं नारायणपुर से कोंडागांव तक NH130D का निर्माण कार्य जारी है. अधूरी सड़क, उड़ती धूल और सीमित दृश्यता के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है.

ट्रक चालकों का कहना है कि धूल के गुबार में सड़क दिखाई नहीं देती, जिससे कई बार वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं और घंटों जाम की स्थिति बन जाती है.बताया जा रहा है कि बीएसपी माइंस से जुड़े लगभग 250 ट्रक और निको से जुड़े करीब 600 ट्रक प्रतिदिन इस मार्ग से गुजरते हैं. इतने बड़े पैमाने पर भारी वाहनों की आवाजाही के कारण जाम और अव्यवस्था आम बात हो गई है. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि या तो प्रतिबंध हटाए जाएं या वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.

प्रदर्शन के दौरान जनप्रतिनिधियों ने एक और अहम मुद्दा उठाया. उनका कहना है कि बीएसपी की खदान नारायणपुर जिले में संचालित है, लेकिन जिला खनिज न्यास (DMF) की राशि दूसरे जिले कांकेर को जा रही है. जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि इससे नारायणपुर जिले के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं. बीएसपी के गोद ग्रामों में अब भी मूलभूत सुविधाओं—सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा—का अभाव है. यदि डीएमएफ की राशि नारायणपुर को मिले, तो क्षेत्र में आधारभूत ढांचे का सुदृढ़ीकरण संभव हो सकेगा.